गुरु-शिष्य परंपरा अनुदान योजना में बदलाव पर सांस्कृतिक संगठनों की चिंता, प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन

  • Post By Admin on Apr 01 2026
गुरु-शिष्य परंपरा अनुदान योजना में बदलाव पर सांस्कृतिक संगठनों की चिंता, प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन

मुजफ्फरपुर : द वे ट्रस्ट, मुजफ्फरपुर ने देशभर के विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों के साथ मिलकर प्रधानमंत्री को एक महत्वपूर्ण ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में गुरु-शिष्य परंपरा (रेपर्टरी अनुदान) योजना के तहत हाल ही में किए गए संशोधनों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है।

ट्रस्ट का कहना है कि 23 मार्च 2026 को जारी कार्यवृत्त में शामिल नए प्रावधानों को पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू किया जा रहा है, जिससे पहले से कार्यरत संस्थाओं को आर्थिक, प्रशासनिक और कलात्मक स्तर पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

ज्ञापन में कहा गया है कि कई सांस्कृतिक संस्थाओं ने पहले से निर्धारित नियमों और मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए कार्यशालाएं, प्रस्तुतियां और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं। भारत रंग महोत्सव के अंतर्गत अनिवार्य प्रस्तुतियों में भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई। इसके बावजूद नए नियमों के कारण अनुदान व्यवस्था में अनिश्चितता और असमानता की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

ट्रस्ट ने निरस्त और “कूलिंग-ऑफ” अवधि, अनुदान वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और संस्थाओं के साथ असमान व्यवहार पर भी सवाल उठाए हैं। इस संबंध में ट्रस्ट ने सरकार से मांग की है कि नए नियमों को केवल भविष्य से लागू किया जाए तथा पहले से की गई प्रतिबद्धताओं को ध्यान में रखते हुए संबंधित संस्थाओं को उचित राहत प्रदान की जाए। साथ ही कलाकारों, गुरुओं और शिष्यों की आजीविका को सुरक्षित रखने तथा पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की भी अपील की गई है।

उल्लेखनीय है कि द वे ट्रस्ट, मुजफ्फरपुर वर्ष 2010 से नाट्य एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। संस्था ने 2010 में मुजफ्फरपुर नाट्य महोत्सव की शुरुआत की तथा 2011 में ग्रीष्मकालीन नाटक कार्यशालाओं का आयोजन किया। इसके अलावा प्रोडक्शन आधारित रंग-संगीत कार्यक्रमों के मंचन के माध्यम से स्थानीय और उभरते कलाकारों को मंच उपलब्ध कराया।

ट्रस्ट ने डिजिटल माध्यमों के जरिए भी नाट्य एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का प्रयास किया है तथा युवाओं को नाटक के क्षेत्र में अध्ययन और करियर बनाने के लिए प्रेरित किया है। संस्था ने उम्मीद जताई है कि सरकार इन मुद्दों पर संवेदनशीलता के साथ विचार कर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी, जिससे देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और संवर्धन सुनिश्चित हो सके।