MLC चुनाव में भाजपा का सोशल इंजीनियरिंग दांव, सवर्ण-अति पिछड़ा संतुलन से साधा चुनावी गणित
- Post By Admin on Jun 06 2026
पटना : बिहार विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव 2026 के लिए उम्मीदवारों की घोषणा के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को स्पष्ट करने की कोशिश की है। पार्टी ने चार उम्मीदवारों के चयन में सवर्ण और अति पिछड़ा वर्ग के बीच संतुलन स्थापित करते हुए आगामी विधानसभा चुनावों के लिए भी मजबूत संदेश देने का प्रयास किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का यह कदम केवल विधान परिषद चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि 2026 के विधानसभा चुनावों की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
भाजपा द्वारा घोषित चार उम्मीदवारों में भोजपुरी अभिनेता और गायक पवन सिंह को राजपूत समाज का प्रतिनिधित्व देते हुए मैदान में उतारा गया है, जबकि वरिष्ठ नेता संजय मयूख कायस्थ समाज से आते हैं। वहीं अनिल कुमार ठाकुर और शीला प्रजापति को अति पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधि के रूप में उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है। इससे पहले भाजपा पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के कार्यकाल समाप्त होने वाली सीट के लिए अरविंद शर्मा के नाम की घोषणा कर चुकी है। भूमिहार समाज से आने वाले अरविंद शर्मा को शामिल कर भाजपा ने विभिन्न प्रभावशाली सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति अपनाई है।
संजय मयूख भाजपा के अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने वर्ष 1990 में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी और संगठन में लगातार सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 1995 में वे बिहार भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष बने और बाद में प्रदेश मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाली। वर्ष 2016 में पहली बार विधान परिषद सदस्य निर्वाचित हुए, 2022 में दूसरी बार एमएलसी बने और अब पार्टी ने उन पर तीसरी बार भरोसा जताया है। संगठन और केंद्रीय नेतृत्व में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
भोजपुरी सिनेमा और संगीत जगत के चर्चित चेहरे पवन सिंह को भाजपा ने पहली बार विधान परिषद चुनाव का उम्मीदवार बनाया है। वर्ष 1997 में अपने गायन करियर की शुरुआत करने वाले पवन सिंह को 2008 में रिलीज हुए गीत ‘लॉलीपॉप लागेलु’ से अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली थी। भोजपुर जिले के आरा में 5 जनवरी 1986 को जन्मे पवन सिंह ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने चाचा अजीत सिंह से प्राप्त की थी। राजनीतिक रूप से पवन सिंह उस समय चर्चा में आए थे जब भाजपा ने उन्हें पश्चिम बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था, हालांकि बाद में उनकी उम्मीदवारी वापस ले ली गई थी। इसके बाद उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में काराकाट सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर राजनीतिक हलकों में सुर्खियां बटोरी थीं। बाद में भाजपा नेतृत्व के साथ उनके संबंध सामान्य हुए और उन्होंने पार्टी के पक्ष में सक्रिय प्रचार भी किया।
पूर्णिया क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ नेता अनिल कुमार ठाकुर को भी भाजपा ने उम्मीदवार बनाया है। वे प्रदेश मंत्री और प्रदेश उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। अति पिछड़ा वर्ग में उनकी पकड़ और लंबे संगठनात्मक अनुभव को देखते हुए पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है। वहीं शीला प्रजापति भाजपा की सक्रिय महिला नेताओं में शामिल हैं। वर्तमान में वह बिहार भाजपा की प्रदेश मंत्री हैं और इससे पहले जिला ग्रामीण इकाई में उपाध्यक्ष की भूमिका निभा चुकी हैं। सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के कारण पार्टी ने उन्हें अति पिछड़ा वर्ग की महिला प्रतिनिधि के रूप में चुनाव मैदान में उतारा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने विधान परिषद चुनाव के जरिए आगामी विधानसभा चुनाव की दिशा में अपनी रणनीतिक सोच का संकेत दिया है। सवर्ण, अति पिछड़ा और महिला प्रतिनिधित्व के संतुलन के माध्यम से पार्टी ने अपने पारंपरिक वोट बैंक के साथ-साथ नए सामाजिक समूहों को भी साधने की कोशिश की है। ऐसे में उम्मीदवारों का यह चयन केवल एमएलसी चुनाव तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे 2026 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है।