विश्वविद्यालय विधेयक के विरोध में शिक्षकों-कर्मचारियों का संयुक्त मोर्चा, राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान
- Post By Admin on Jul 25 2026
पटना : बिहार सरकार द्वारा प्रस्तावित विश्वविद्यालय विधेयक-2026 के विरोध में राज्य के शिक्षक एवं कर्मचारी संगठनों ने संयुक्त रूप से आंदोलन की रणनीति तैयार कर ली है। शनिवार को पटना के लोहिया नगर, कंकड़बाग स्थित डॉ. ए.के. सेन भवन में आयोजित राज्यस्तरीय संयुक्त बैठक में चार प्रमुख शिक्षक एवं कर्मचारी संगठनों ने विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बचाने के लिए राज्यव्यापी संघर्ष छेड़ने का निर्णय लिया।
बैठक में बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुटाब), बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय सेवा शिक्षक महासंघ (फुस्टाब), बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ तथा बिहार राज्य विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता फुस्टाब के उपाध्यक्ष सह विधान पार्षद डॉ. वीरेन्द्र नारायण यादव, फुटाब के उपाध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार सिंह तथा कर्मचारी महासंघों के नेताओं वेंकटेश कुमार और राधवेंद्र कुमार ने संयुक्त रूप से की।
विधेयक से खत्म होगी विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता
बैठक को संबोधित करते हुए फुटाब के महासचिव सह विधान पार्षद प्रो. संजय कुमार सिंह ने कहा कि बिहार सरकार बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1976 और पटना विश्वविद्यालय अधिनियम-1976 को निरस्त कर नया विश्वविद्यालय विधेयक-2026 लाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने दावा किया कि मॉनसून सत्र में इस विधेयक को पेश करने की तैयारी थी, लेकिन शिक्षक एवं कर्मचारी संगठनों के संयुक्त प्रयास से इसे फिलहाल टाल दिया गया। हालांकि, भविष्य में इसे फिर से लाए जाने की आशंका बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विधेयक लागू होने पर विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता प्रभावित होगी और उच्च शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। इसे केवल शिक्षकों और कर्मचारियों ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों, अभिभावकों और पूरे राज्य के हितों के खिलाफ बताते हुए उन्होंने व्यापक जनआंदोलन खड़ा करने की घोषणा की।
शिक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा व्यापक प्रभाव
विधान पार्षद मदन मोहन झा ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल प्रशासनिक संस्थान नहीं हैं, बल्कि शिक्षण, अनुसंधान, परीक्षा, नियुक्ति और शैक्षणिक मानकों के निर्धारण की स्वायत्त इकाइयाँ हैं। उन्होंने आशंका जताई कि प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने पर विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक और शैक्षणिक अधिकारिता सीमित हो जाएगी तथा कई महत्वपूर्ण निर्णय कार्यपालिका के अधीन चले जाएंगे।
विधान पार्षद डॉ. वीरेन्द्र नारायण यादव ने कहा कि बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था अपनी विशिष्ट संरचना के कारण देश में अलग पहचान रखती है। उन्होंने कहा कि राज्य के अंगीभूत महाविद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट शैक्षणिक और शोध कार्य के लिए जाने जाते हैं, इसलिए उनकी स्वायत्तता को बनाए रखना आवश्यक है।
राज्यस्तरीय संयुक्त संघर्ष समिति का गठन
बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी विश्वविद्यालयों में शिक्षक और कर्मचारी संगठनों को और अधिक सक्रिय किया जाएगा तथा उनके बीच समन्वय मजबूत किया जाएगा। साथ ही प्रस्तावित विधेयक के विरोध में राज्यव्यापी आंदोलन संचालित करने के लिए एक राज्यस्तरीय संयुक्त संघर्ष समिति का गठन किया गया। समिति में चारों राज्यस्तरीय संगठनों के दो-दो प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। इसके संयोजक प्रो. संजय कुमार सिंह और गंगा प्रसाद झा बनाए गए हैं, जबकि वेंकटेश कुमार को मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। संयोजकों को आगामी आंदोलन की रूपरेखा और कार्यक्रम तय करने के लिए अधिकृत किया गया है।
बैठक की शुरुआत डॉ. ए.के. सेन की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। कार्यक्रम के अंत में ब्रज किशोर सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। बैठक में पटना विश्वविद्यालय सहित राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षक एवं कर्मचारी संगठनों के अनेक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।