डर से विश्वास तक का सफर : सावन खैरमा में टीकाकरण बना जनआंदोलन
- Post By Admin on Jun 19 2026
लखीसराय : जिला मुख्यालय से करीब 29 किलोमीटर दूर रामगढ़ प्रखंड का सावन खैरमा गांव आज स्वास्थ्य जागरूकता की एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरा है। कभी टीकाकरण को लेकर फैले अंधविश्वास और भ्रांतियों के कारण स्वास्थ्य कर्मियों का विरोध करने वाला यह गांव अब नियमित टीकाकरण के प्रति पूरी तरह सजग हो चुका है। ग्रामीण अब स्वयं अपने बच्चों के टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम का इंतजार करते हैं।
करीब एक दशक पहले तक गांव में आधुनिक चिकित्सा और टीकाकरण को लेकर गहरा अविश्वास था। जब आशा कार्यकर्ता और एएनएम कंचन देवी टीकाकरण अभियान लेकर गांव पहुंचती थीं, तो कई परिवार अपने घरों के दरवाजे बंद कर लेते थे। लोगों का मानना था कि स्वस्थ दिखने वाले बच्चों को टीका लगाने की कोई आवश्यकता नहीं है। सामाजिक दबाव और गलत धारणाओं के कारण कई अभिभावक टीकाकरण से दूरी बनाए रखते थे।
स्वास्थ्य विभाग ने बदली रणनीति
रामगढ़ के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक अरुण कुमार बताते हैं कि शुरुआती दौर में यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती थी। इसे केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी न मानते हुए विभाग ने विशेष रणनीति अपनाई। गांव में हर महीने दो दिन विशेष टीकाकरण सत्र आयोजित किए जाने लगे और आशा कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर लोगों को जागरूक किया। चौपालों और व्यक्तिगत संवाद के माध्यम से टीकाकरण के लाभ समझाए गए।
आंकड़ों में दिखा बदलाव
लगातार प्रयासों का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। जिस गांव में कभी टीकाकरण को लेकर विरोध का माहौल था, वहां नियमित टीकाकरण कवरेज 87.5 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। स्थिति यह है कि अब ग्रामीण स्वयं आशा कार्यकर्ताओं से टीकाकरण सत्र की जानकारी लेते हैं और बच्चों को समय पर टीका लगवाने के लिए केंद्रों तक पहुंचते हैं।
जिले में भी बेहतर हो रहे स्वास्थ्य संकेतक
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार भारती ने बताया कि सावन खैरमा का बदलाव पूरे जिले में चल रहे स्वास्थ्य जागरूकता अभियान की सफलता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सामुदायिक सहभागिता आधारित प्रयासों और 'मिशन इंद्रधनुष' जैसे अभियानों के कारण बिहार में टीकाकरण कवरेज में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसका सकारात्मक प्रभाव शिशु स्वास्थ्य पर भी दिखाई दे रहा है और शिशु मृत्यु दर में कमी आई है।
ग्रामीणों ने भी स्वीकारा बदलाव
गांव निवासी विकास कुमार, जिन्होंने हाल ही में अपने नवजात बच्चे का टीकाकरण कराया है, कहते हैं कि पहले जानकारी के अभाव में लोग टीकाकरण से डरते थे, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि लोगों को समझ आ गया है कि बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए समय पर टीकाकरण बेहद जरूरी है। अब ग्रामीण स्वयं जागरूक होकर टीकाकरण केंद्र पहुंच रहे हैं। सावन खैरमा की यह कहानी बताती है कि जागरूकता, सतत प्रयास और सामुदायिक सहभागिता के बल पर अंधविश्वास की मजबूत दीवारों को भी गिराया जा सकता है। आज यह गांव स्वास्थ्य सुरक्षा और जनभागीदारी का एक सफल मॉडल बनकर उभरा है।