टीबी से लड़ाई में जीते बुनबुन, अब बने जागरूकता के संदेशवाहक

  • Post By Admin on May 03 2026
टीबी से लड़ाई में जीते बुनबुन, अब बने जागरूकता के संदेशवाहक

लखीसराय : मजदूरी की तलाश में दिल्ली गए लखीसराय के बुनबुन दास के लिए एक सामान्य बुखार समझी जाने वाली बीमारी जानलेवा साबित हो सकती थी, लेकिन समय पर जांच और इलाज ने उनकी जिंदगी बदल दी। आज वे न सिर्फ पूरी तरह स्वस्थ हैं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा बन गए हैं।

घर लौटने के बाद लगातार बुखार और कमजोरी को बुनबुन ने पहले मामूली समझकर नजरअंदाज किया। उन्होंने बाजार से दवा लेकर इलाज करने की कोशिश की, लेकिन हालत बिगड़ती गई। बुनबुन बताते हैं कि वे इतने कमजोर हो गए थे कि उन्होंने गांव की आशा कार्यकर्ता पप्पी कुमारी से सिर्फ सलाइन चढ़वाकर ठीक होने की गुहार लगाई, ताकि फिर से काम पर लौट सकें।

हालांकि, आशा कार्यकर्ता पप्पी कुमारी की सतर्कता ने उनकी जिंदगी बचा ली। उन्होंने बुनबुन की लगातार खांसी को गंभीरता से लेते हुए उन्हें सदर अस्पताल में जांच कराने के लिए प्रेरित किया। जांच में फेफड़ों की टीबी (पल्मोनरी टीबी) की पुष्टि हुई।

टीबी की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा उनका निःशुल्क इलाज शुरू किया गया। स्वास्थ्य प्रबंधक निशांत राज के अनुसार, बुनबुन ने पूरे 9 महीने तक नियमित रूप से दवा का सेवन किया और सभी चिकित्सकीय निर्देशों का पालन किया, जिसके चलते वे पूरी तरह संक्रमण मुक्त हो गए।

बीमारी से उबरने के बाद बुनबुन अब जागरूकता फैलाने का काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल की मुफ्त दवा और आशा कार्यकर्ता की सही सलाह ने उन्हें नया जीवन दिया है।

जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुधांशु नारायण लाल ने बताया कि जिले में चल रहे ‘100 डेज’ जागरूकता अभियान के तहत बुनबुन जैसे लोगों की कहानियां दूसरों को प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि कोई भी संदिग्ध मरीज जांच से वंचित न रहे और टीबी मुक्त समाज का सपना साकार हो।