4,000 साल पुरानी दवा का कमाल, एस्पिरिन गोली से कैंसर रोकने के नए संकेत

  • Post By Admin on Apr 30 2026
4,000 साल पुरानी दवा का कमाल, एस्पिरिन गोली से कैंसर रोकने के नए संकेत

नई दिल्ली: यह रिपोर्ट चिकित्सा जगत में एक बड़ी चर्चा का विषय बनी हुई है एक पुरानी और आम दवा अब कैंसर जैसे गंभीर रोग से लड़ाई में नई उम्मीद बनकर उभर रही है।

करीब 4,000 साल पुराने इतिहास वाली दवा एस्पिरिन (Aspirin) को अब केवल दर्द या बुखार की दवा नहीं, बल्कि कुछ खास तरह के ट्यूमर को बनने और फैलने से रोकने में भी प्रभावी पाया जा रहा है। हाल के शोध और क्लिनिकल ट्रायल्स ने इस बात के मजबूत संकेत दिए हैं कि यह दवा विशेष परिस्थितियों में कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है।

ब्रिटेन के एक व्यक्ति निक जेम्स, जिन्हें जेनेटिक बीमारी लिंच सिंड्रोम था, इस शोध का अहम हिस्सा बने। यह बीमारी आंतों के कैंसर का खतरा बहुत बढ़ा देती है। लेकिन लगातार कई वर्षों तक एस्पिरिन लेने के बाद उनमें अब तक कैंसर विकसित नहीं हुआ, जो वैज्ञानिकों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, एस्पिरिन शरीर में कई स्तरों पर काम करती है। यह सूजन को कम करने, खून के थक्के बनने की प्रक्रिया को रोकने और कैंसर कोशिकाओं के फैलाव (मेटास्टेसिस) को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है। कुछ शोध यह भी बताते हैं कि यह इम्यून सिस्टम को कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और नष्ट करने में सहायता देती है। कई बड़े अध्ययनों में पाया गया है कि जिन लोगों ने नियमित रूप से कम से कम दो साल तक एस्पिरिन ली, उनमें कोलोरेक्टल (आंतों) कैंसर का खतरा लगभग 50% तक कम हो गया। यही कारण है कि ब्रिटेन जैसे देशों में अब हाई-रिस्क मरीजों के लिए मेडिकल गाइडलाइंस में बदलाव भी किए गए हैं।

हालांकि, यह दवा जितनी फायदेमंद है, उतनी ही सावधानी भी मांगती है। इसके साइड इफेक्ट्स जैसे पेट में अल्सर, अंदरूनी रक्तस्राव और अन्य जटिलताएं भी हो सकती हैं। इसलिए विशेषज्ञ साफ तौर पर कहते हैं कि बिना डॉक्टर की सलाह के इसे नियमित रूप से लेना खतरनाक हो सकता है। फिलहाल वैज्ञानिक यह जानने में जुटे हैं कि क्या एस्पिरिन अन्य प्रकार के कैंसर में भी उतनी ही प्रभावी है या नहीं। इस दिशा में बड़े स्तर पर अंतरराष्ट्रीय ट्रायल जारी हैं, जिनके नतीजे आने वाले समय में चिकित्सा जगत की दिशा तय कर सकते हैं।

कुल मिलाकर, हजारों साल पुरानी यह साधारण दवा अब आधुनिक विज्ञान में एक नई भूमिका निभाने के कगार पर है लेकिन इसका उपयोग कब, कैसे और किसके लिए किया जाए, यह फैसला अभी भी डॉक्टर और शोधकर्ताओं के हाथ में ही है।