अब मुंबई नहीं, बिहार बनेगा नया सिनेमा हब, 40 फिल्मों को मिली शूटिंग की मंजूरी

  • Post By Admin on Jan 17 2026
अब मुंबई नहीं, बिहार बनेगा नया सिनेमा हब, 40 फिल्मों को मिली शूटिंग की मंजूरी

पटना: जिस बिहार को लंबे समय तक सिर्फ अपनी संस्कृति, इतिहास और परंपराओं के लिए जाना जाता था, वही बिहार अब कैमरे की नजर में देश का अगला बड़ा सिनेमा हब बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। राज्य की गलियां, घाट, पहाड़ियां और ऐतिहासिक धरोहरें अब फिल्मों की कहानियों का कैनवास बन रही हैं। हालात ऐसे हैं कि मुंबई के बाद बिहार को फिल्म निर्माताओं के लिए एक नए और भरोसेमंद डेस्टिनेशन के तौर पर देखा जाने लगा है।

बिहार अब केवल भोजपुरी या क्षेत्रीय सिनेमा तक सीमित नहीं रहा। राज्य सरकार की बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति ने बिहार को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म मानचित्र पर नई पहचान दिलाई है। अब तक 40 फिल्मों को राज्य में शूटिंग की अनुमति दी जा चुकी है, जिनमें से 33 फिल्मों का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। यह आंकड़ा साफ तौर पर बताता है कि फिल्म इंडस्ट्री का भरोसा बिहार पर लगातार मजबूत हो रहा है और राज्य एक फिल्म-फ्रेंडली डेस्टिनेशन के रूप में उभर चुका है।

  • पटना से राजगीर तक कैमरे की चमक

पटना, राजगीर, नालंदा, गया, भागलपुर और मोतिहारी जैसे शहर अब फिल्म शूटिंग के नए केंद्र बनते जा रहे हैं। राजगीर की पहाड़ियां, नालंदा का ऐतिहासिक गौरव, गया के धार्मिक स्थल, भागलपुर की प्राकृतिक सुंदरता और मोतिहारी की साहित्यिक विरासत फिल्मकारों को आकर्षित कर रही है। इन लोकेशनों ने फिल्मों को न सिर्फ नया विजुअल ट्रीट दिया है, बल्कि बिहार की छवि को भी देश-दुनिया में एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया है।

अब बिहार में सिर्फ भोजपुरी और मगही फिल्मों की ही नहीं, बल्कि हिंदी और अंग्रेजी फिल्मों के प्रोजेक्ट भी तेजी से बढ़ रहे हैं। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि बिहार का सिनेमा क्षेत्रीय सीमाओं को तोड़कर राष्ट्रीय और वैश्विक मंच की ओर कदम बढ़ा चुका है। फिल्म प्रोत्साहन नीति के तहत परमिट प्रक्रिया को आसान किए जाने से फिल्म निर्माताओं को भरोसेमंद और अनुकूल माहौल मिल रहा है।

  • स्थानीय कारोबार और रोजगार को मिल रहा बढ़ावा

फिल्म शूटिंग का सीधा फायदा बिहार के स्थानीय कारोबार को मिल रहा है। होटल, कैटरिंग, ट्रांसपोर्ट, लाइटिंग, सेट डिजाइन और लोकल टेक्नीशियन जैसे क्षेत्रों में काम के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। शूटिंग के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल रहा है। अब सिनेमा सिर्फ कला का माध्यम नहीं, बल्कि बिहार के लिए आर्थिक विकास का एक मजबूत इंजन बनता जा रहा है।

राज्य सरकार तकनीकी कौशल विकास पर भी विशेष जोर दे रही है। बिहार राज्य फिल्म विकास निगम द्वारा आयोजित वर्कशॉप और मास्टर क्लास के जरिए युवाओं को कैमरा ऑपरेशन, साउंड रिकॉर्डिंग, एडिटिंग और फिल्म प्रोडक्शन की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। इससे युवाओं को बाहर पलायन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उन्हें अपने राज्य में ही रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।

  • मुंबई में होगी बड़ी बैठक, खुलेगा नया रास्ता

कला एवं संस्कृति विभाग के मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने बिहार को उभरता हुआ फिल्म हब बताते हुए मार्च-अप्रैल में मुंबई में बड़े फिल्म निर्माताओं और निर्देशकों के साथ विशेष बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य बिहार को एक सशक्त फिल्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करना और अधिक से अधिक फिल्म प्रोजेक्ट राज्य में लाना है।

कुल मिलाकर, बिहार अब सिर्फ इतिहास और परंपरा की धरती नहीं रहा, बल्कि सिनेमा की नई प्रयोगशाला बनता जा रहा है। कैमरे की रोशनी में चमकता यह नया बिहार आने वाले समय में भारतीय फिल्म उद्योग का एक बड़ा और मजबूत चेहरा बन सकता है।