भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में गुणवत्ता विकास और शिक्षक प्रशिक्षण पर तीन दिवसीय मंथन
- Post By Admin on Jun 26 2026
मुजफ्फरपुर : भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित शिक्षक प्रशिक्षण की गुणवत्ता को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आयोजित भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय की तीन दिवसीय वार्षिक कार्यशाला-2026 का शुक्रवार को समापन हो गया। 24 से 26 जून तक आयोजित कार्यशाला में बीते शैक्षणिक वर्ष के अकादमिक, प्रशासनिक एवं रचनात्मक कार्यों की समीक्षा के साथ आगामी सत्र 2026-27 की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई।
कार्यशाला का शुभारंभ वैदिक वंदना, दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ हुआ। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राकेश कुमार पाल ने विषय प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी केवल शिक्षकों को तैयार करना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए सक्षम, तकनीकी रूप से दक्ष एवं शोधपरक सोच वाले शिक्षकों का निर्माण करना है। कार्यशाला के प्रथम दिवस लोक शिक्षा समिति, बिहार के प्रदेश सचिव रामलाल सिंह के जन्मदिवस पर महाविद्यालय परिसर में पौधारोपण किया गया। उन्होंने इसे पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ते हुए कहा कि जिस प्रकार शिक्षक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं, उसी प्रकार वृक्ष समाज और प्रकृति को जीवन प्रदान करते हैं।
मुख्य अतिथि कांटी प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी डॉ. आनंद कुमार विभूति ने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने शिक्षकों से निरंतर अध्ययन, शोध तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया। साथ ही अरुणिमा सिन्हा के संघर्ष का उदाहरण देते हुए दृढ़ इच्छाशक्ति और राष्ट्र समर्पण का संदेश दिया। विशिष्ट अतिथि रामलाल सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के मूल सिद्धांतों, पंचकोशात्मक विकास, रोजगारपरक शिक्षा, 'लोकल फॉर वोकल' तथा भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आचार्य चाणक्य और चंद्रगुप्त के उदाहरणों के माध्यम से शिक्षक की भूमिका को रेखांकित किया।
कार्यशाला के दूसरे दिन महाविद्यालय के सह सचिव अंकज कुमार एवं प्राचार्य डॉ. राकेश कुमार पाल ने वार्षिक कार्यों की समीक्षा करते हुए आगामी सत्र के लिए बीएड एवं डीएलएड पाठ्यक्रम, शोध गतिविधियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा अन्य शैक्षणिक योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षक प्रशिक्षण को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया। समापन सत्र की अध्यक्षता महाविद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) सत्यनारायण गुप्ता ने की। उन्होंने महाविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं विद्या भारती के शैक्षिक उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी भावना और नागरिक कर्तव्य जैसे विषयों को समाज निर्माण के लिए आवश्यक बताते हुए पतंजलि के अष्टांग योग तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर भी विचार व्यक्त किए।
समापन अवसर पर प्राध्यापक सरोज कुमार ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों एवं कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। तीनों दिनों तक कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक वंदना एवं पूजा-अर्चना से हुई, जबकि समापन संघ प्रार्थना और वंदे मातरम् के साथ किया गया। वंदे मातरम् का संचालन शारीरिक शिक्षा विभाग के प्राध्यापक प्रबल बेरा ने किया।कार्यक्रम में कोशी विभाग के विभाग निरीक्षक कृष्ण कुमार, पूर्व क्षेत्र निरीक्षक प्रमोद कुमार ठाकुर, मुजफ्फरपुर विभाग निरीक्षक राजेश रंजन सहित महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। अंत में प्राचार्य डॉ. राकेश कुमार पाल एवं अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) सत्यनारायण गुप्ता ने सभी को आगामी सत्र की शुभकामनाएं देते हुए तैयार कार्ययोजना को प्रभावी ढंग से लागू करने का आह्वान किया।