603 पंचायत सचिवों के लंबित तबादले पर भाकपा का सरकार पर हमला, पारदर्शिता की मांग

  • Post By Admin on Aug 11 2026
603 पंचायत सचिवों के लंबित तबादले पर भाकपा का सरकार पर हमला, पारदर्शिता की मांग

लखीसराय : भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), जिला परिषद लखीसराय ने पंचायती राज विभाग, बिहार सरकार द्वारा पंचायत सचिवों के अंतर-जिला तबादले की प्रक्रिया में कथित अनियमितता और अनुसूचित जाति के कर्मियों के साथ भेदभाव किए जाने का आरोप लगाया है। पार्टी ने लंबित 603 पंचायत सचिवों के तबादले पर अविलंब निर्णय लेने की मांग की है।

भाकपा के वरिष्ठ नेता जितेंद्र कुमार, जिला सचिव हर्षित यादव तथा जिला कार्यकारिणी सदस्य सह वरीय अधिवक्ता रजनीश कुमार द्वारा जारी संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि राज्य में कुल 2,005 पंचायत सचिवों के अंतर-जिला तबादले का मामला लंबे समय से पंचायती राज विभाग में लंबित था।  नेताओं के अनुसार, विभाग ने 7 अगस्त 2026 को 1,402 पंचायत सचिवों का तबादला कर दिया, जबकि 603 पंचायत सचिवों के मामले लंबित रखे गए। भाकपा का दावा है कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन लंबित मामलों में बड़ी संख्या अनुसूचित जाति वर्ग के पंचायत सचिवों की है।

पार्टी नेताओं ने कहा कि यदि यह तथ्य सही है तो यह अत्यंत गंभीर मामला है और इससे सरकार की तबादला नीति की पारदर्शिता एवं निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगता है। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा में तबादले की प्रक्रिया समानता, पारदर्शिता और निष्पक्षता के सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि किसी भी कर्मचारी के साथ उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर भेदभाव किया जाना संविधान की मूल भावना और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

भाकपा ने राज्य सरकार और पंचायती राज विभाग से मांग की है कि 603 लंबित पंचायत सचिवों के अंतर-जिला तबादले के संबंध में अपनाए गए आधार और मानदंड सार्वजनिक किए जाएं। साथ ही पात्र अनुसूचित जाति के पंचायत सचिवों सहित सभी लंबित कर्मियों के तबादले पर शीघ्र और निष्पक्ष निर्णय लिया जाए। पार्टी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी अनुसूचित जाति के कर्मियों के अधिकारों और न्यायपूर्ण तबादला नीति की मांग को लेकर लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करने पर विचार करेगी। भाकपा जिला परिषद, लखीसराय ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा कर पारदर्शी तबादला व्यवस्था लागू करने की मांग दोहराई है।