भारतीय ज्ञान परंपरा पर आरडीएस कॉलेज में राष्ट्रीय संगोष्ठी, शिक्षा में मूल्यों और संस्कृति पर मंथन

  • Post By Admin on Jul 02 2026
भारतीय ज्ञान परंपरा पर आरडीएस कॉलेज में राष्ट्रीय संगोष्ठी, शिक्षा में मूल्यों और संस्कृति पर मंथन

मुजफ्फरपुर : भारतीय शिक्षा दिवस के अवसर पर राम दयालु सिंह (आरडीएस) कॉलेज के श्रीकृष्ण सभागार में गुरुवार को 'भारतीय ज्ञान परंपरा : शिक्षा, संस्कृति एवं समकालीन परिप्रेक्ष्य' विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन कॉलेज की आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, उत्तर बिहार प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। संगोष्ठी में शिक्षा के भारतीय स्वरूप, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक एवं बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) दिनेश चंद्र राय ने भारतीय शिक्षा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति का समग्र विकास, चरित्र निर्माण और नैतिक मूल्यों का विकास होना चाहिए। उन्होंने महात्मा गांधी और स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि विज्ञान और तकनीक में आगे बढ़ने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और मूल्यों को भी सहेजकर रखना आवश्यक है। उन्होंने अनुशासन को सफलता का मूलमंत्र बताया।

मुख्य वक्ता के रूप में त्रिपुरा केंद्रीय विश्वविद्यालय, अगरतला के साहित्य संकाय के अधिष्ठाता एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय भाषा मंच के सह-संयोजक प्रो. (डॉ.) विनोद कुमार मिश्र ने कहा कि वर्ष 2004 में शुरू हुआ 'शिक्षा बचाओ आंदोलन' आज भारतीय शिक्षा, चरित्र निर्माण और इतिहास के पुनर्स्थापन की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक शिक्षा व्यवस्था ने भारतीय ज्ञान परंपरा को कमजोर किया, जबकि बिहार की धरती नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविख्यात ज्ञान केंद्रों की रही है। उन्होंने मातृभाषा, मातृभूमि और भारतीय चिंतन की परंपरा को शिक्षा का आधार बनाने पर बल दिया।

विशिष्ट वक्ता एवं विश्वविद्यालय के महाविद्यालय निरीक्षक (कला एवं वाणिज्य) प्रो. (डॉ.) राजीव कुमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा समन्वय, संवाद और सत्य की खोज पर आधारित है। उन्होंने भारतीय संस्कृति को प्राचीन होने के साथ-साथ सदैव नवीन और जीवंत बताते हुए कहा कि शास्त्र और लोक परंपरा का अद्भुत संगम ही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। उन्होंने यक्ष-युधिष्ठिर संवाद का उल्लेख करते हुए सम्यक श्रवण और तत्वबोध को सच्चे ज्ञान की पहचान बताया।

इससे पूर्व कॉलेज के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) शशि भूषण कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में कुलपति के नेतृत्व में भारतीय ज्ञान परंपरा पर लगातार सार्थक शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संगोष्ठी का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, परंपरा और जीवन मूल्यों से जोड़ना है। कार्यक्रम का संचालन संगोष्ठी संयोजक डॉ. भगवान कुमार (गणित विभाग) एवं पंकज कुमार तिवारी ने संयुक्त रूप से किया। समापन अवसर पर डॉ. रजनी कांत पांडेय ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी अतिथियों, शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। संगोष्ठी में बड़ी संख्या में प्राध्यापक, शोधार्थी, बुद्धिजीवी एवं छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही।