बीआरएबीयू ने अनुदानित कॉलेजों से मांगा उपयोगिता प्रमाण पत्र, लंबित वेतन भुगतान की प्रक्रिया तेज
- Post By Admin on Jul 31 2026
मुजफ्फरपुर : बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू), मुजफ्फरपुर ने अनुदानित संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के लंबित वेतन भुगतान को लेकर महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल की है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने शैक्षणिक सत्र 2014-17 तथा पूर्व के सत्र 2011-14, 2012-15 और 2013-16 (जहां लागू हो) के लिए राज्य सरकार से प्राप्त प्रदर्शन आधारित सहायक अनुदान के वितरण संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कुलसचिव कार्यालय से जारी पत्र संबंधित महाविद्यालयों के प्राचार्यों को अनुपालन के लिए भेज दिया गया है। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि अनुदान का वितरण बिहार सरकार द्वारा निर्धारित नियमों, शर्तों और वित्तीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही किया जाएगा।
विश्वविद्यालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार महाविद्यालयों को संबंधित सत्र में राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। साथ ही रिक्त पदों पर की गई नियुक्तियों की वैधता और उनसे संबंधित अभिलेखों का सत्यापन करना अनिवार्य होगा। निर्देशों में कहा गया है कि प्रदर्शन आधारित सहायक अनुदान की राशि केवल पात्र कर्मियों को समुचित जांच और सत्यापन के बाद ही दी जाएगी। प्रत्येक महाविद्यालय को भुगतान से संबंधित उपयोगिता प्रमाण पत्र, व्यय विवरण तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराने होंगे। वित्तीय एवं लेखा संबंधी सभी औपचारिकताओं का पालन सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया है।
विश्वविद्यालय ने अपने पत्र में मानव संसाधन विकास विभाग और शिक्षा विभाग, बिहार सरकार द्वारा पूर्व में जारी विभिन्न आदेशों और पत्रों का उल्लेख करते हुए कहा है कि अनुदान वितरण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, नियमसम्मत और जवाबदेह तरीके से संचालित की जाएगी। इसके अतिरिक्त बीआरएबीयू ने स्पष्ट किया है कि अनुदान वितरण के बाद संबंधित महाविद्यालयों को निर्धारित प्रारूप में उपयोगिता प्रमाण पत्र और व्यय प्रतिवेदन जमा करना अनिवार्य होगा। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आगे की वित्तीय समायोजन प्रक्रिया और संभावित अनुदान वितरण पर विचार किया जाएगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य अनुदानित महाविद्यालयों के शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को लंबित वित्तीय लाभ उपलब्ध कराना, वेतन भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना तथा राज्य सरकार के निर्देशों के अनुरूप अनुदान वितरण को व्यवस्थित और जवाबदेह बनाना है।