सदर अंचल में जमीन फर्जीवाड़े का आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग

  • Post By Admin on Jan 03 2026
सदर अंचल में जमीन फर्जीवाड़े का आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग

लखीसराय : सदर अंचल कार्यालय में फर्जी जमाबंदी कायम कर जमीन हड़पने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि भू-माफिया की मिलीभगत से अंचल कार्यालय के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों ने नियमों को ताक पर रखकर रजिस्टर-2 में छेड़छाड़ की और फर्जी तरीके से जमाबंदी कायम कर दी। मामले को लेकर पीड़ित ने उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाया है।

जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2021-22 में सदर अंचल कार्यालय द्वारा रजिस्टर-2 में छेड़छाड़ कर कामी सिंह के स्थान पर काशी सिंह का नाम अंकित करते हुए फर्जी रसीद निर्गत की गई। जबकि विवादित भूमि की ऑफलाइन रसीद पूर्व में अझोला कुमरी, पत्नी कामी सिंह के नाम से नियमित रूप से कट रही थी। इसके बावजूद बिना आवश्यक दस्तावेजों के सत्यापन के मात्र चार माह के भीतर विपक्षी के नाम दो बार ऑनलाइन रसीद जारी कर दी गई।

विवादित भूमि बालगुदर मौजा अंतर्गत खाता संख्या 250, खसरा संख्या 37 से 74 (तौजी संख्या 5) की कुल रकबा 3 एकड़ 36 डिसमिल बताई जा रही है। आरोप है कि इस जमीन पर अवैध कब्जा जमाने की नीयत से फर्जी नामांतरण कर काशी सिंह के नाम जमाबंदी कायम की गई।

फरियादी पंकज कुमार का कहना है कि वह वर्ष 2016 से अंचल कार्यालय सहित विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर शिकायत करते आ रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मार्च 2023 में अपर समाहर्ता को दी गई लिखित शिकायत पर यह कहकर मामला लौटा दिया गया कि पति के नाम से संबंधित होने के कारण राजस्व न्यायालय सक्षम नहीं है। इसके बाद 21 फरवरी 2025 को जिला मजिस्ट्रेट से गुहार लगाई गई, जो अब तक जांचाधीन बताई जा रही है।

फरियादी का आरोप है कि दिसंबर 2025 में आयोजित राजस्व महाअभियान शिविर के दौरान उन्होंने विभागीय मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री (स्थानीय विधायक) तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन अधिकारियों ने मुलाकात नहीं होने दी और मात्र 15 दिनों में कार्रवाई का आश्वासन देकर टाल दिया। निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने से निराशा हाथ लगी है।

पीड़ित ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि वह दोषी हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए, अन्यथा निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि किन परिस्थितियों में पहले से कट रही रसीद को निरस्त कर नई जमाबंदी कायम की गई और चार माह के भीतर दो बार रसीद कैसे जारी हुई।

मामले में विभागीय उदासीनता के कारण भू-माफियाओं के हौसले बुलंद बताए जा रहे हैं, जिससे राजस्व व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सदर अंचल अधिकारी और जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फरियादी ने चेतावनी दी है कि शीघ्र जांच और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में वह उच्च न्यायालय की शरण लेंगे, जिससे जनाक्रोश बढ़ सकता है।