वेद प्रचार सप्ताह के छठे दिन यज्ञ और महिला सम्मेलन, नारी शिक्षा व वैदिक जीवन पर जोर

  • Post By Admin on Sep 02 2026
वेद प्रचार सप्ताह के छठे दिन यज्ञ और महिला सम्मेलन, नारी शिक्षा व वैदिक जीवन पर जोर

मुजफ्फरपुर: घिरनी पोखर स्थित आर्य समाज की ओर से आयोजित वेद प्रचार सप्ताह के छठे दिन यजुर्वेद पारायण महायज्ञ के साथ महिला सम्मेलन का आयोजन किया गया। दिनभर चले कार्यक्रम में वैदिक संस्कृति, पंचमहायज्ञ, नारी शिक्षा और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता का संदेश दिया गया।

प्रातःकालीन सत्र में प्रो. (डॉ.) व्यास नन्दन शास्त्री वैदिक के ब्रह्मत्व में यजुर्वेद पारायण महायज्ञ संपन्न हुआ। आठ जोड़ी यजमान दंपतियों के साथ बड़ी संख्या में आर्य समाज के महिला-पुरुष और बच्चों ने यजुर्वेद के 34वें अध्याय के मंत्रों के साथ विश्व कल्याण की कामना करते हुए आहुतियां दीं।यज्ञ के बाद प्रो. शास्त्री ने यज्ञ को वैदिक संस्कृति का प्राण बताते हुए कहा कि भारतीय वैदिक परंपरा में सोलह संस्कारों सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों की पूर्णता यज्ञ-हवन से जुड़ी है। उन्होंने श्रद्धापूर्वक यज्ञ करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

बैरगनिया से पहुंचे आचार्य सदानन्द शास्त्री ने पंचमहायज्ञ की अवधारणा समझाते हुए ब्रह्मयज्ञ, देवयज्ञ, पितृयज्ञ, अतिथियज्ञ और बलिवैश्वदेव यज्ञ के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि गृहस्थ जीवन में इन पांचों यज्ञों का नियमित पालन व्यक्ति को अपने परिवार, समाज, प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति जिम्मेदारी का बोध कराता है। उन्होंने पंचमहायज्ञ पर स्वरचित कविता भी प्रस्तुत की। वाराणसी से आए स्वामी राजेन्द्र योगी सरस्वती और नेपाल से पहुंचे पं. ज्ञान चंद आर्य भजनोपदेशक ने ईश्वर भक्ति एवं यज्ञ की महत्ता से जुड़े भजनों की प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। सायंकालीन सत्र में अनिला आर्या की अध्यक्षता में महिला सम्मेलन आयोजित हुआ। वैदिक संध्या के मंत्रों के साथ सम्मेलन की शुरुआत हुई। मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) व्यास नन्दन शास्त्री वैदिक ने महिलाओं की शिक्षा और सामाजिक अधिकारों के संदर्भ में महर्षि दयानन्द सरस्वती के योगदान को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि महर्षि दयानन्द ने महिलाओं को शिक्षा और वेद मंत्रों के अध्ययन का अधिकार देने के साथ बाल विवाह, वृद्ध विवाह जैसी कुरीतियों के विरोध और विधवा विवाह के समर्थन के माध्यम से समाज सुधार का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि आर्य समाज की ओर से कन्या गुरुकुलों के माध्यम से महिलाओं को वेद-शास्त्र की शिक्षा देने का कार्य किया जा रहा है। महिला सम्मेलन में महिलाओं को लोपामुद्रा, मदालसा, गार्गी और मैत्रेयी जैसी वैदिक विदुषियों के आदर्शों से प्रेरणा लेने तथा वैदिक शिक्षा के साथ सामाजिक जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने पाखंड से दूर रहकर वेदमार्ग पर चलने का आह्वान किया। सम्मेलन के दौरान सुकन्या आर्या, जशवाला सिंह आर्या, भारती शर्मा, नीतू आर्या, निशा कुमारी और पं. ज्ञान चंद आर्य ने भजनों की प्रस्तुति दी। स्वामी राजेन्द्र योगी सरस्वती, आचार्य सदानन्द शास्त्री और आचार्य कमलेश दिव्यदर्शी ने भी महिला सम्मेलन को संबोधित करते हुए वैदिक जीवन-पद्धति अपनाने का आह्वान किया।