छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ पर बवाल, परीक्षा केंद्रों पर ग्रेस टाइम अनिवार्य करने की मांग

  • Post By Admin on Feb 03 2026
छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ पर बवाल, परीक्षा केंद्रों पर ग्रेस टाइम अनिवार्य करने की मांग

मुजफ्फरपुर : इंटरमीडिएट एवं आगामी मैट्रिक (10वीं) परीक्षा को लेकर परीक्षा व्यवस्था में व्याप्त असमानता पर अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन (बिहार) ने गहरी चिंता जताई है। संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर तत्काल ठोस निर्णय लिया जाए।

संगठन का कहना है कि एक ओर कई सरकारी विद्यालयों में शिक्षक और पदाधिकारी आधे से एक घंटे की देरी से पहुंचकर भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा लेते हैं, जबकि दूसरी ओर छात्र-छात्राएं यदि मात्र पांच मिनट की देरी से परीक्षा केंद्र पर पहुंचते हैं, तो उन्हें परीक्षा कक्ष में प्रवेश से वंचित कर दिया जाता है। इससे उनका पूरा एक शैक्षणिक वर्ष बर्बाद हो जाता है, जो कि पूर्णतः अन्यायपूर्ण है।

अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन ने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन बताते हुए कहा कि ट्रैफिक जाम, परिवहन बाधा एवं अन्य प्रशासनिक कारणों से होने वाली देरी का दंड छात्रों को देना न्यायसंगत नहीं है। संगठन ने मांग की है कि इंटर और मैट्रिक परीक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा प्रारंभ समय के बाद न्यूनतम 15 मिनट का ग्रेस टाइम अनिवार्य रूप से दिया जाए, ताकि किसी भी छात्र का भविष्य कुछ मिनटों की देरी के कारण प्रभावित न हो।

संगठन ने यह भी कहा कि शिक्षकों और पदाधिकारियों के लिए कठोर समयपालन नियम लागू किए जाएं तथा डिजिटल या बायोमेट्रिक उपस्थिति के माध्यम से जवाबदेही तय की जाए, जिससे नियम सभी पर समान रूप से लागू हों।

इस संबंध में संगठन के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अमरजीत कुमार यादव ने कहा कि यदि छात्रहित और मानवाधिकार से जुड़े मामलों में प्रशासन की ओर से गंभीरता नहीं दिखाई गई, तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को बाध्य होगा। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल छात्रों के अधिकारों की रक्षा करना है, ताकि परीक्षा व्यवस्था में समानता और न्याय सुनिश्चित किया जा सके।