विक्रमशिला पुल टूटने के बाद नावों के सहारे सफर, जोखिम में हजारों लोगों की जिंदगी

  • Post By Admin on May 11 2026
विक्रमशिला पुल टूटने के बाद नावों के सहारे सफर, जोखिम में हजारों लोगों की जिंदगी

पटना : विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के बाद भागलपुर और सीमांचल के बीच आवागमन गंभीर रूप से प्रभावित हो गया है। पुल के करीब 25 मीटर हिस्से के टूटने के बाद अब लोग गंगा नदी पार करने के लिए छोटी-बड़ी नावों और सरकारी जहाजों का सहारा लेने को मजबूर हैं। प्रतिदिन हजारों लोग जान जोखिम में डालकर इस पार से उस पार यात्रा कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि 4.7 किलोमीटर लंबे विक्रमशिला पुल के क्षतिग्रस्त होने से नवगछिया अनुमंडल सहित कोसी और सीमांचल क्षेत्र के सात जिलों के लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। भागलपुर क्षेत्र का प्रमुख व्यापारिक और चिकित्सा केंद्र होने के कारण यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना होता है। पुल पर आवागमन बाधित होने के बाद बरारी घाट और महादेवपुर घाट के बीच सरकारी जहाजों की दो-दो फेरियां चलाई जा रही हैं। इसके अलावा करीब 75 नावों का संचालन भी किया जा रहा है, जिनके माध्यम से प्रतिदिन लगभग 12 हजार से 15 हजार यात्रियों को गंगा पार कराया जा रहा है।

हालांकि प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा को लेकर अब भी चिंता बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश यात्री बिना लाइफ जैकेट के 45 से 50 मिनट तक नावों में सफर करने को मजबूर हैं। कुछ लोग अपनी व्यवस्था से लाइफ जैकेट पहनकर यात्रा कर रहे हैं। नावों के बीच टक्कर की आशंका भी लगातार बनी हुई है। प्रशासन की ओर से बरारी घाट पर अस्थायी यात्री शेड, सूचना केंद्र, स्वास्थ्य शिविर और जीविका दीदियों की रसोई की व्यवस्था की गई है। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के स्वयंसेवक नावों में यात्रियों की संख्या नियंत्रित कर रहे हैं, जबकि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीम लगातार पेट्रोलिंग कर रही है।

नदी पार करने के लिए प्रति यात्री 50 रुपए किराया निर्धारित किया गया है, जबकि बच्चों के लिए 20 रुपए शुल्क तय किया गया है। मोटरसाइकिल और साइकिल ले जाने के लिए भी अलग शुल्क निर्धारित किया गया है। नावों का संचालन सुबह 5 बजे से शाम 5 बजे तक किया जा रहा है।