पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान की समीक्षा, गुणवत्ता और प्रामाणिकता पर जोर

  • Post By Admin on May 11 2026
पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान की समीक्षा, गुणवत्ता और प्रामाणिकता पर जोर

लखीसराय : ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा संचालित पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान की समीक्षा को लेकर मुख्य सचिव, बिहार की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्यभर के जिलों में चल रहे सर्वेक्षण कार्यों और पांडुलिपि प्रविष्टियों की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई।

बैठक में बताया गया कि राज्य स्तर पर बड़ी संख्या में ऐसी प्रविष्टियां अस्वीकृत की गई हैं, जिनमें निर्धारित मानकों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया था। इसी कारण बिहार की रैंकिंग राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित हुई है और राज्य चौथे स्थान पर पहुंच गया है। लखीसराय जिले में भी गुणवत्ता परीक्षण के दौरान कई प्रविष्टियां तकनीकी एवं प्रक्रियागत त्रुटियों के कारण अस्वीकृत की गई हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अभियान का उद्देश्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐतिहासिक महत्व की प्रामाणिक और मानक अनुरूप पांडुलिपियों का सही दस्तावेजीकरण सुनिश्चित करना है। इसके लिए संबंधित व्यक्तियों को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और सतत निगरानी के माध्यम से सहयोग दिया जा रहा है।

जिला कला एवं संस्कृति कार्यालय द्वारा पांडुलिपियों के अपलोड को लेकर कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अनुसार केवल स्पष्ट और मानक अनुरूप फोटोग्राफ ही अपलोड किए जाएं। 75 वर्ष से अधिक पुरानी हस्तलिखित एवं ज्ञान-सामग्री युक्त सामग्री को ही पांडुलिपि श्रेणी में शामिल किया जाए। साथ ही एक ही पांडुलिपि की बार-बार प्रविष्टि नहीं करने, सही श्रेणी चयन करने तथा शीर्षक, भाषा, विषय और संरक्षक संबंधी विवरण सही तरीके से दर्ज करने पर जोर दिया गया है।

जिला पदाधिकारी शैलेन्द्र कुमार ने जिलेवासियों, शिक्षण संस्थानों, मठ-मंदिरों, निजी संग्रहकर्ताओं और सांस्कृतिक संस्थाओं से अपील की है कि वे अपने पास सुरक्षित पुरानी हस्तलिखित सामग्री, अभिलेख और पांडुलिपियों की जानकारी “ज्ञान भारतम् मिशन” ऐप पर अपलोड करें तथा इसकी सूचना प्रशासन को उपलब्ध कराएं। इससे जिले की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत के संरक्षण को मजबूती मिलेगी।