बिहार में तालाबों पर तैरेंगे सोलर प्लांट, ऊर्जा और जल संरक्षण को मिलेगी नई ताकत
- Post By Admin on Jul 28 2026
पटना : बिहार में बढ़ती ऊर्जा मांग और लगातार गिरते भूजल स्तर को देखते हुए राज्य सरकार ने ऊर्जा उत्पादन और जल संरक्षण को एक साथ बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। इसी क्रम में बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड (BSPHCL) ने राज्य के सभी जिलों में फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट स्थापित करने की योजना पर काम तेज कर दिया है।
BSPHCL के प्रबंध निदेशक ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर अपने-अपने जिलों में फ्लोटिंग सौर ऊर्जा संयंत्रों के विकास के लिए उपयुक्त जलाशयों की पहचान कर शीघ्र रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। यह पहल राज्य सरकार के ‘जल-जीवन-हरियाली अभियान’ के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।निर्धारित मानकों के अनुसार परियोजना के लिए ऐसे जलाशयों का चयन किया जाएगा जिनका जल प्रसार क्षेत्र कम से कम 10 एकड़ तथा गहराई न्यूनतम 3 मीटर हो। साथ ही संबंधित जलाशय पर सरकार अथवा स्थानीय प्राधिकरण का स्पष्ट स्वामित्व और प्रशासनिक नियंत्रण होना आवश्यक होगा।
राज्य में फ्लोटिंग सोलर तकनीक के सकारात्मक परिणाम पहले ही देखने को मिल रहे हैं। दरभंगा और सुपौल जैसे जिलों में तालाबों के ऊपर स्थापित फ्लोटिंग सोलर पैनलों से 1.6 से 2 मेगावाट तक बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। इस तकनीक की विशेषता यह है कि इसके लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता नहीं होती, जबकि जलाशयों में वाष्पीकरण कम होने से जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं से किसानों और मछुआरों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। एक ओर स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर जल संसाधनों का बेहतर संरक्षण संभव हो सकेगा।
राज्य सरकार और केंद्र सरकार आवासीय तथा व्यावसायिक भवनों की छतों पर सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित करने के लिए भी सब्सिडी उपलब्ध करा रही हैं। इसके माध्यम से आम लोगों को अक्षय ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। दक्षिण बिहार के गया, औरंगाबाद और नवादा जैसे जिलों में सूखे की समस्या तथा उत्तर बिहार के कई क्षेत्रों में बाढ़ और जल प्रदूषण की चुनौतियों के बीच फ्लोटिंग सोलर परियोजना को एक प्रभावी और टिकाऊ समाधान के रूप में देखा जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इससे राज्य में हरित ऊर्जा उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ जल संरक्षण के प्रयासों को भी नई मजबूती मिलेगी।