E-20 पेट्रोल विवाद में मारुति सुज़ुकी को झटका, उपभोक्ता आयोग ने दिया नई कार देने का आदेश
- Post By Admin on Jul 16 2026
रायपुर : इथेनॉल मिश्रित ई-20 पेट्रोल को लेकर बढ़ती चर्चाओं के बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा एक अहम फैसला सामने आया है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुज़ुकी को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता की खराब कार वापस लेकर 45 दिनों के भीतर उसी मॉडल की नई ई-20 अनुकूल कार उपलब्ध कराए। ऐसा नहीं करने पर कंपनी को वाहन की पूरी कीमत और अन्य मदों सहित 20.50 लाख रुपये लौटाने होंगे।
मामला रायपुर के सड्डू निवासी डॉ. प्रेमराज देवता से जुड़ा है, जिन्होंने जून 2024 में जनवरी 2023 मॉडल की ग्रैंड विटारा स्ट्रांग हाइब्रिड जेटा प्लस कार खरीदी थी। वाहन खरीदने के कुछ समय बाद ही कार बार-बार रास्ते में बंद होने लगी। अधिकृत सर्विस सेंटर में जांच के दौरान ईंधन से संबंधित समस्या बताई गई। ईंधन बदलने और मरम्मत के बावजूद वाहन में खराबी दूर नहीं हुई। इसके बाद डॉ. देवता ने सरकारी प्रयोगशाला से पेट्रोल की जांच कराई। जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने वाहन निर्माता और डीलर से संपर्क किया, लेकिन उन्हें यह कहकर राहत नहीं दी गई कि समस्या ई-20 पेट्रोल के कारण उत्पन्न हुई है। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
सुनवाई के दौरान आयोग ने माना कि संबंधित वाहन का इंजन ई-20 पेट्रोल के अनुकूल नहीं था और वाहन बेचते समय कंपनी तथा डीलर ने उपभोक्ता को इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी। आयोग ने इसे सेवा में कमी माना और कहा कि आधुनिक वाहनों की तकनीकी सीमाओं तथा ईंधन की अनुकूलता की जानकारी उपभोक्ता को देना निर्माता और विक्रेता की जिम्मेदारी है। आयोग ने आदेश दिया कि मारुति सुज़ुकी 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को उसी मॉडल की नई, ई-20 अनुकूल कार उपलब्ध कराए। यदि कंपनी ऐसा नहीं करती है तो उसे वाहन की कीमत 18.29 लाख रुपये, आरटीओ शुल्क 1.86 लाख रुपये और बीमा राशि 34,644 रुपये सहित कुल 20.50 लाख रुपये लौटाने होंगे। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना के लिए एक लाख रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये का भुगतान भी करना होगा।
उपभोक्ता अधिकारों के जानकारों का मानना है कि यह फैसला वाहन निर्माताओं और डीलरों की जवाबदेही तय करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय है। साथ ही, यह स्पष्ट संदेश देता है कि वाहन की तकनीकी क्षमता और ईंधन संबंधी आवश्यक जानकारी उपभोक्ता से छिपाना सेवा में कमी माना जाएगा।