सड़क मरम्मत रिपोर्ट पर उठे सवाल, कार्यपालक अभियंता पर एफआईआर की मांग से बढ़ी हलचल
- Post By Admin on Jul 10 2026
मुजफ्फरपुर: सहिला–रामपुर–नरमा सड़क की जर्जर स्थिति को लेकर विवाद अब कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं छात्र राजद के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष अमरेन्द्र कुमार ने ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता एवं अन्य संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। इसके लिए उन्होंने रामपुर हरि थाना के साथ-साथ डीएसपी (पूर्वी), एसएसपी तथा डीजीपी को ई-मेल के माध्यम से आवेदन भेजा है।
आवेदन में अमरेन्द्र कुमार ने आरोप लगाया है कि उन्होंने सहयोग पोर्टल पर सड़क की बदहाल स्थिति और पिछले ढाई वर्षों से अनुरक्षण कार्य नहीं होने की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद विभाग की ओर से जिलाधिकारी को भेजे गए प्रतिवेदन में कहा गया कि सड़क पंचवर्षीय अनुरक्षण अवधि में है तथा मरम्मत कार्य कराया जा रहा है और एक सप्ताह के भीतर कार्य पूरा कर लिया जाएगा। शिकायतकर्ता का आरोप है कि विभाग के इस दावे के बावजूद मौके पर किसी प्रकार का प्रभावी मरम्मत कार्य नहीं कराया गया। उनका कहना है कि सड़क आज भी जर्जर स्थिति में है और विभाग द्वारा भेजी गई रिपोर्ट वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाती।
अमरेन्द्र कुमार ने आरोप लगाया कि शिकायत को बंद कराने और विभागीय जवाबदेही से बचने के उद्देश्य से जानबूझकर भ्रामक एवं तथ्यहीन प्रतिवेदन भेजा गया। उनका कहना है कि सरकारी अभिलेखों में गलत जानकारी दर्ज कर जिला प्रशासन और आम जनता को गुमराह करने का प्रयास किया गया है। अपने आवेदन में उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने, सड़क का वास्तविक स्थल निरीक्षण कराने तथा यदि प्रतिवेदन असत्य पाया जाता है तो संबंधित कार्यपालक अभियंता एवं अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। अमरेन्द्र कुमार ने कहा कि यदि सरकारी अभिलेखों में अनुरक्षण कार्य दर्शाकर राशि की निकासी या अन्य किसी प्रकार की अनियमितता हुई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स के पैसे के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है।
फिलहाल इस मामले में विभाग की ओर से इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब पुलिस और जिला प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला विभागीय जवाबदेही और सरकारी प्रतिवेदनों की विश्वसनीयता से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन सकता है।