सावन शिवरात्रि और खुदीराम बोस बलिदान दिवस पर पर्यावरण भारती का पौधारोपण अभियान

  • Post By Admin on Aug 11 2026
सावन शिवरात्रि और खुदीराम बोस बलिदान दिवस पर पर्यावरण भारती का पौधारोपण अभियान

बक्सर : सावन शिवरात्रि और स्वतंत्रता सेनानी शहीद खुदीराम बोस के बलिदान दिवस के अवसर पर पर्यावरण भारती द्वारा रघुनाथपुर, ब्रह्मपुर प्रखंड के अंतर्गत फलदार आम के पौधों का पौधारोपण किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व पर्यावरण प्रहरी शैलेश कुमार ओझा ने किया।

पौधारोपण कार्यक्रम में पर्यावरण भारती के संस्थापक, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के प्रांत संयोजक तथा अखिल भारतीय पेड़ उपक्रम टोली सदस्य राम बिलास शाण्डिल्य ने कहा कि सावन माह भगवान भोलेनाथ की आराधना का पवित्र समय है और इस अवसर पर प्रत्येक शिव भक्त को कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए। उन्होंने पौधारोपण को धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए इसे मानव कल्याण का महत्वपूर्ण कार्य बताया।

राम बिलास शाण्डिल्य ने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए पृथ्वी पर कम से कम 33 प्रतिशत वन क्षेत्र आवश्यक माना जाता है, जबकि वर्तमान में जंगलों की कटाई के कारण हरित क्षेत्र में लगातार कमी आ रही है। उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान ऑक्सीजन संकट का उल्लेख करते हुए वृक्षों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि पर्यावरण भारती वर्ष 2008 से निरंतर वृक्षारोपण अभियान चला रही है। संस्था के अनुसार अब तक 1,24,983 पौधे लगाए जा चुके हैं, हालांकि इनमें से कुछ पौधे विभिन्न कारणों से नष्ट भी हुए हैं। संस्था ने भविष्य में पांच लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने जल, जमीन, जंगल, जानवर और जन को पर्यावरण के पांच प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि इन सभी के संतुलन से ही स्वस्थ पर्यावरण संभव है। उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग, बाढ़, सूखा, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं को पर्यावरण असंतुलन से जोड़ते हुए व्यापक वृक्षारोपण की आवश्यकता पर बल दिया।

पर्यावरण संरक्षण के सह प्रांत जनसंवाद प्रमुख शैलेश कुमार ओझा ने बताया कि 11 अगस्त 1908 को मात्र 19 वर्ष की आयु में क्रांतिकारी खुदीराम बोस को मुजफ्फरपुर जेल में फांसी दी गई थी। उन्होंने कहा कि देश के सबसे युवा क्रांतिकारियों में शामिल खुदीराम बोस का बलिदान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में अमिट है। उन्होंने खुदीराम बोस के जीवन का उल्लेख करते हुए बताया कि उनका जन्म 3 दिसंबर 1889 को पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर जिले में हुआ था। उन्होंने कम उम्र में ही पढ़ाई छोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया और 1908 में अंग्रेज जज किंग्सफोर्ड पर बम हमले के मामले में गिरफ्तार होने के बाद उन्हें फांसी दी गई।

पर्यावरण भारती ने बलिदान दिवस पर पौधारोपण को शहीदों की स्मृति में प्रकृति संरक्षण का प्रतीकात्मक प्रयास बताया। कार्यक्रम में शैलेश कुमार ओझा, राम बिलास शाण्डिल्य, अनूप ओझा, शिवानी कुमारी, दिव्या कुमारी, संध्या कुमारी, अनन्या कुमारी, आनंद पाल, शिवम कुमार, सत्यम कुमार, शिवांश सहित कई कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने भाग लिया।