लखीसराय में मासिक कवि गोष्ठी आयोजित, कवियों ने रचनाओं से बांधा समां

  • Post By Admin on Aug 30 2026
लखीसराय में मासिक कवि गोष्ठी आयोजित, कवियों ने रचनाओं से बांधा समां

लखीसराय : जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन, लखीसराय के तत्वावधान में रविवार को स्थानीय प्रभात चौक स्थित होटल भारती के सभागार में मासिक कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष अरविंद कुमार भारती ने की, जबकि संचालन उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह आजाद ने किया। कार्यकारी अध्यक्ष मुन्द्रीका सिंह ने कार्यक्रम में पहुंचे कवियों और साहित्यकारों का स्वागत किया।

कवि गोष्ठी में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए कवि और साहित्यकारों ने अपनी-अपनी रचनाओं का पाठ कर साहित्यिक वातावरण को जीवंत बना दिया। रचनाओं में हिंदी भाषा के उत्थान, सामाजिक सरोकार, बदलते मानवीय मूल्यों, प्रकृति और ग्रामीण जीवन के साथ-साथ धार्मिक भावनाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया।

राजकुमार ने अपनी रचना ‘हिंदी के उत्थान से होगा मेरा देश महान’ के माध्यम से हिंदी भाषा के विकास और राष्ट्र की प्रगति का संदेश दिया। भोला पंडित ने अपनी रचना ‘नजारा देख दुनिया का जिगर रो-रोकर यह कहता है, सुधा रस जो पिलाता था वही अब विष पिलाता है’ के जरिए बदलते सामाजिक संबंधों की पीड़ा को स्वर दिया। बलजीत कुमार ने ‘कांटों में भी हंसते रहता है गुलाब का फूल’ रचना प्रस्तुत की।

राजेश्वरी सिंह ने ‘नव बसंत के आंगन में फूलों सा खिला है मेरा गांव, दिन में पीपल और रात में तारे देते जहां है छांव’ के माध्यम से गांव और प्रकृति की सुंदर छवि प्रस्तुत की। वहीं दशरथ प्रसाद महतो ने अपनी रचना में पर्यावरण और पक्षियों के घटते अस्तित्व पर चिंता जताते हुए लोगों से जागरूक होने का आह्वान किया।

देवेंद्र सिंह आजाद ने ‘पहले सांप था इच्छाधारी, अब इच्छाधारी इंसान है, मतलब निकल जाने के बाद बदल जाता ईमान है’ के माध्यम से बदलते मानवीय व्यवहार पर कटाक्ष किया। मुन्द्रीका सिंह ने गणेश वंदना ‘सुमर ले पहले गिरजानंदन, जय गणेश भगवान, विघ्न विनायक, मंगल दायक प्रथम पूज्य भगवान’ प्रस्तुत की। वहीं अरविंद कुमार भारती ने ‘सरकार तो होती अंधी है, कहती नियमों से बंधी है, आपकी हालत से उनका क्या, उनकी हालत तो चंगी है’ के जरिए व्यवस्था पर व्यंग्य किया।

इस अवसर पर नवलकंठ के प्रधान संपादक अरविंद कुमार भारती और संपादक राजेश्वरी प्रसाद सिंह ने सभी कवि और साहित्यकारों से दो-तीन दिनों के भीतर अपनी रचनाएं उपलब्ध कराने का आग्रह किया, ताकि उनका प्रकाशन किया जा सके। कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ कवि दशरथ प्रसाद महतो ने धन्यवाद ज्ञापन किया। आयोजन को सफल बनाने में लक्ष्मी नारायण कृष्णा, अविनाश कुमार, सोनू कुमार, राज कुमार सहित अन्य लोगों का सराहनीय सहयोग रहा।