अंतरराष्ट्रीय दादा-दादी दिवस पर पर्यावरण भारती ने किया पौधारोपण, पांच ‘ज’ के संरक्षण का दिया संदेश
- Post By Admin on Sep 13 2026
खगड़िया : अंतरराष्ट्रीय दादा-दादी दिवस के अवसर पर रविवार, 13 सितंबर को पर्यावरण भारती की ओर से परबत्ता प्रखंड की सौढ़ उत्तरी पंचायत के बुद्धनगर (भरतखंड) में पौधारोपण अभियान चलाया गया। इस दौरान देव वृक्ष पीपल के तीन, आम का एक और बरहर का एक पौधा लगाया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व पर्यावरणविद एवं शिक्षक सिद्धार्थ कुमार ने किया, जबकि दयानंद महतों ने सहयोग किया।
पर्यावरण भारती के संस्थापक, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के प्रांत संयोजक एवं अखिल भारतीय पेड़ उपक्रम टोली के सदस्य राम बिलास शाण्डिल्य ने पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर विचार रखते हुए कहा कि पर्यावरण पांच ‘ज’ जल, जमीन, जंगल, जानवर और जन से मिलकर बनता है। उन्होंने कहा कि मानव ने विकास के क्रम में प्राकृतिक संसाधनों पर अपना अधिकार स्थापित किया, जिसके कारण जंगलों की लगातार कटाई और प्राकृतिक संतुलन में बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे और वन्यजीव पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। पक्षी नए स्थानों तक बीज पहुंचाने के साथ खेतों में मौजूद कीट-पतंगों को नियंत्रित करने में भी भूमिका निभाते हैं। ऐसे में गौरैया समेत अन्य पक्षियों के संरक्षण के लिए उनके प्राकृतिक आवास को बचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पेड़ों की कटाई के कारण पक्षियों के आश्रय स्थल लगातार कम हो रहे हैं।
राम बिलास शाण्डिल्य ने लोगों से अपने घरों के आसपास कम से कम 10 पेड़ लगाने और पांच वर्षों तक उनकी देखभाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए बड़े स्तर पर पौधारोपण और पौधों का संरक्षण आवश्यक है। पर्यावरण भारती की स्थापना वर्ष 2008 में पटना महानगर के राजेंद्र नगर में वृक्षारोपण अभियान के उद्देश्य से की गई थी। संगठन का मुख्य उद्देश्य समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करना है। संस्था के अनुसार अब तक 1,25,903 पौधे लगाए जा चुके हैं, जिनमें करीब 20 प्रतिशत पौधे विभिन्न कारणों से नष्ट हो गए।
पर्यावरणविद शिक्षक सिद्धार्थ कुमार ने अंतरराष्ट्रीय दादा-दादी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सितंबर का दूसरा रविवार दादा-दादी दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि अमेरिका में इसकी आधिकारिक घोषणा वर्ष 1978 में राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने की थी और वर्ष 1979 में पहली बार वहां दादा-दादी दिवस मनाया गया। वर्तमान में विभिन्न देशों में यह दिवस मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि इस दिवस का उद्देश्य परिवार के वरिष्ठ सदस्यों, विशेषकर दादा-दादी के प्रति सम्मान और उनके महत्व को समझना है। दादा-दादी के पास जीवन के अनुभवों का बड़ा भंडार होता है और उनका स्नेह एवं मार्गदर्शन बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उनकी कहानियों और अनुभवों से बच्चों को संस्कार, अनुशासन और पारिवारिक मूल्यों की सीख मिलती है। ऐसे अवसर पर पौधारोपण करना पर्यावरण संरक्षण के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक उपयोगी संदेश है। पौधारोपण कार्यक्रम में शिक्षक सिद्धार्थ कुमार, दयानंद महतों, राम बिलास शाण्डिल्य, कापो मुनि, शकलदेव मुनि, मंजुला देवी, प्रमिला देवी, बालदेव साह, अर्जित कुमार, आयूष कुमार, राम चरित्र शर्मा, रौनक, शिवम, सुधांशु, भारती, अभिषेक, विक्की सहित अन्य लोगों ने भाग लिया।