कला संवाद में सम्मानित हुए वरिष्ठ रंगकर्मी एवं शिक्षक सुधीर कुमार

  • Post By Admin on Sep 07 2026
कला संवाद में सम्मानित हुए वरिष्ठ रंगकर्मी एवं शिक्षक सुधीर कुमार

मुजफ्फरपुर: सरला श्रीवास सोशल कल्चरल रिसर्च फाउंडेशन की ओर से मालीघाट में ‘कला संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कठपुतली कलाकार कांता देवी ने की। इस दौरान कला, संस्कृति, रंगमंच और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में वरिष्ठ रंगकर्मी एवं शिक्षक सुधीर कुमार तथा शिक्षक मुकेश कुमार मालाकार को उनके दीर्घ, समर्पित एवं प्रेरणादायी योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अध्यक्ष कांता देवी ने कहा कि कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रभावी साधन भी है। कठपुतली कला लंबे समय से सामाजिक संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम रही है। उन्होंने कहा कि इस लोक कला परंपरा को आगे बढ़ाने की प्रेरणा सरला श्रीवास एवं शांति गुप्ता के कार्यों से मिलती है। उन्होंने कहा कि कठपुतली कला भारत की समृद्ध लोक एवं पारंपरिक कलाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बदलते समय और डिजिटल तकनीक के दौर में इस कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ आधुनिक माध्यमों से जोड़ने की आवश्यकता है, ताकि इसकी समृद्ध परंपरा को संरक्षित किया जा सके।

सरला श्रीवास युवा मंडल की अध्यक्ष सुमन कुमारी ने कहा कि कला तभी सार्थक होती है, जब वह समाज के जीवन को बेहतर बनाने का माध्यम बने। उन्होंने कहा कि सरला श्रीवास ने कठपुतली कला के माध्यम से समाज को जोड़ने, लोगों को जागरूक करने, हिंसा के खिलाफ संदेश देने और शांति की भावना को मजबूत करने का महत्वपूर्ण कार्य किया। इस अवसर पर मध्य विद्यालय चकिया के प्रधानाध्यापक एवं वरिष्ठ रंगकर्मी सुधीर कुमार तथा मध्य विद्यालय टरमा के फिजिकल शिक्षक मुकेश कुमार मालाकार को उनके दीर्घ एवं समर्पित योगदान के लिए कठपुतली कलाकार एवं फाउंडेशन के सचिव सुनील कुमार ने ‘लीचिया लाले लाल’ पुस्तक एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।

चार दशकों से रंगमंच से जुड़े हैं सुधीर कुमार

कठपुतली कलाकार सुनील कुमार ने सुधीर कुमार के रंगमंचीय योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि सरकारी शिक्षक के रूप में जिम्मेदारियों के निर्वहन के साथ वे लगभग चार दशकों से रंगमंच के क्षेत्र में सक्रिय हैं। मुजफ्फरपुर के गोला रोड, दुर्गा स्थान निवासी सुधीर कुमार विभिन्न प्रशिक्षण मॉड्यूल में ‘शिक्षा में नाटक कला’ के मास्टर ट्रेनर के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।

बीपीएससी 1999 बैच के तहत सहायक प्रशिक्षित शिक्षक रहे सुधीर कुमार वर्तमान में राजकीय मध्य विद्यालय चकिया, कुढ़नी, मुजफ्फरपुर के प्रधानाध्यापक हैं। कला, संस्कृति और थिएटर में उनकी विशेष रुचि रही है। नाटक, कहानी एवं पटकथा लेखन के साथ-साथ लघु फिल्म, टेलीफिल्म, नाटक और वृत्तचित्र के निर्माण एवं निर्देशन में भी उन्होंने योगदान दिया है। सुधीर कुमार संरचना आर्ट थिएटर के संस्थापक सचिव हैं, जिसकी स्थापना 27 मार्च 1987 को हुई थी। वे मंच संचालन एवं आयोजन प्रबंधन से भी जुड़े रहे हैं। इसके अलावा वे रोटरी इंटरनेशनल के सदस्य तथा रोटरी क्लब ऑफ लिच्छवी, मुजफ्फरपुर के बोर्ड सदस्य भी रहे हैं। गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए नि:शुल्क कंप्यूटर शिक्षा केंद्र संचालित करने के साथ पुस्तक प्रकाशन के क्षेत्र में भी उनका योगदान रहा है। वर्ष 2010 में उनका हिंदी नाटक संग्रह ‘रामलीला’ प्रकाशित हुआ। इसके अतिरिक्त ‘आदमियत महंगी है’ नामक नाटक संग्रह भी उनके साहित्यिक एवं रंगमंचीय योगदान को दर्शाता है।

सुनील कुमार के अनुसार, रंगमंच एवं सामाजिक क्षेत्र में योगदान के लिए सुधीर कुमार को जिला स्तर पर 300 से अधिक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। नाटक एवं थिएटर के क्षेत्र में उन्हें राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला है। बिहार सरकार, जिला प्रशासन मुजफ्फरपुर तथा शिक्षा विभाग की ओर से भी उन्हें विभिन्न अवसरों पर सम्मानित किया जा चुका है। कार्यक्रम के दौरान सुनील कुमार ने वरिष्ठ रंगकर्मी सुधीर कुमार एवं शिक्षक मुकेश कुमार मालाकार के दीर्घ एवं समर्पित योगदान की सराहना की और उनके स्वस्थ, सक्रिय एवं रचनात्मक जीवन की कामना की। कार्यक्रम के अंत में अमन चिल्ड्रेन स्कूल की प्राचार्य बबिता ठाकुर ने धन्यवाद ज्ञापन किया।