विधानसभा में गूंजा JPSC-JSSC विवाद, छात्र लाठीचार्ज पर सत्ता-विपक्ष आमने-सामने
- Post By Admin on Aug 11 2026
रांची : झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र का चौथा दिन JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितता, पेपर लीक और छात्र आंदोलन के मुद्दे पर भारी हंगामे की भेंट चढ़ गया। विपक्ष ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए सरकार को घेरा, जबकि सत्ता पक्ष ने कहा कि सरकार संवाद के लिए तैयार है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र 6 अगस्त से शुरू होकर 12 अगस्त तक निर्धारित है। पांच कार्यदिवसीय इस सत्र में प्रश्नकाल, अनुपूरक बजट, विभिन्न विभागों की रिपोर्ट और कई विधेयकों पर चर्चा होनी है। हालांकि सत्र की शुरुआत से ही JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और छात्र आंदोलन सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है।सोमवार को रांची में JPSC और JSSC अभ्यर्थियों ने विधानसभा घेराव को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच तनाव बढ़ गया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया तथा आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई में कई छात्रों के घायल होने की खबर है। अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं।
पुलिस कार्रवाई के बाद मंगलवार को विधानसभा में विपक्ष ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। विपक्षी सदस्यों ने सरकार से घटना पर जवाब मांगा और उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए सदन में नारेबाजी की। कई सदस्य वेल में पहुंचकर विरोध प्रदर्शन करने लगे, जिससे कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि भर्ती परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही शिकायतों से युवाओं का भरोसा टूट रहा है और छात्रों की आवाज दबाने के लिए बल प्रयोग किया गया। उन्होंने पूरे JPSC-JSSC प्रकरण की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
वहीं सत्ता पक्ष ने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से ले रही है। सरकार ने आश्वासन दिया कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई गई तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही छात्रों से बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की बात भी कही गई। छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई के बाद झारखंड की राजनीति गरमा गई है। अब मानसून सत्र का मुख्य केंद्र JPSC-JSSC विवाद बन चुका है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।