दुनिया का चौथा सबसे लंबा बराज है बिहार का इंद्रपुरी बराज, जानिए इसका गौरवशाली इतिहास
- Post By Admin on May 14 2026
रोहतास: बिहार के रोहतास जिले के तिलौथू प्रखंड स्थित इंद्रपुरी बराज, जिसे सोन बराज के नाम से भी जाना जाता है, देश की ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं में शामिल है। सोन नदी पर बना यह बराज न सिर्फ बिहार की कृषि व्यवस्था की रीढ़ रहा है, बल्कि इंजीनियरिंग का भी अद्भुत उदाहरण माना जाता है।
सोन नदी मध्य प्रदेश के अमरकंटक के पास से निकलती है और उत्तर प्रदेश, झारखंड तथा बिहार से गुजरते हुए पटना के समीप गंगा नदी में मिल जाती है। इस नदी की रेत पीले रंग की होने के कारण इसे “सोन” नदी कहा जाता है, क्योंकि इसकी बालू सोने की तरह चमकती है। यही रेत बिहार समेत उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भवन निर्माण के लिए उपयोग की जाती है। इंद्रपुरी बराज की लंबाई 1407 मीटर (4616 फीट) है और इसे दुनिया का चौथा सबसे लंबा बराज माना जाता है। इस बराज पर सड़क पुल भी बनाया गया है। इसका निर्माण प्रसिद्ध निर्माण कंपनी एचसीसी द्वारा किया गया था, जिसने फरक्का बराज का भी निर्माण किया था। इंद्रपुरी बराज का निर्माण 1960 के दशक में शुरू हुआ और वर्ष 1968 में इसे चालू किया गया। इससे जुड़ी लगभग 209 मील लंबी मुख्य नहरें, 150 मील छोटी नहरें और हजारों मील तक फैली उपनहरें बिहार के कई जिलों में सिंचाई का आधार बनीं। रोहतास, भोजपुर, बक्सर, कैमूर, पटना, औरंगाबाद, अरवल और जहानाबाद जैसे जिलों के लाखों एकड़ खेतों तक पानी पहुंचाया गया।
इससे पहले डेहरी-ऑन-सोन में अंग्रेजों के समय बना एनिकट सिंचाई का प्रमुख माध्यम था। वर्ष 1868 में शुरू हुई सोन नहर प्रणाली को ईस्ट इंडिया इरिगेशन एंड कैनाल कंपनी ने विकसित किया था। लेकिन समय के साथ एनिकट में बालू भरने लगी और पानी का प्रवाह कम हो गया। इसके बाद 1965 में इंद्रपुरी बराज का निर्माण कर पुरानी नहरों को इससे जोड़ा गया। इससे करीब 17.5 लाख एकड़ खेतों तक सिंचाई व्यवस्था दोबारा मजबूत हुई। साथ ही गया और औरंगाबाद जिलों के करीब पांच लाख एकड़ अतिरिक्त खेतों को भी सिंचाई सुविधा मिली। एक समय ऐसा था जब सोन नहर प्रणाली की मुख्य डेहरी-आरा नहर में नौ फीट गहरा पानी बहता था और इसमें जल परिवहन भी होता था। सैकड़ों मालवाहक और यात्री स्टीमर इस मार्ग से संचालित होते थे, जो सोन नदी के रास्ते गंगा तक पहुंचते थे।
हालांकि बाद में मध्य प्रदेश में बाणसागर और उत्तर प्रदेश में रिहंद जलाशय बनने के बाद इंद्रपुरी बराज में पानी की आवक कम हो गई, जिससे सोन नहर प्रणाली पर असर पड़ा। इसके बावजूद इंद्रपुरी बराज आज भी बिहार की सिंचाई व्यवस्था और ऐतिहासिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
**खबर की तस्वीर केवल सांकेतिक है...