शहीद वारिस अली रोड नामकरण और स्मारक निर्माण की मांग, केंद्रीय मंत्री राजभूषण चौधरी को सौंपा गया ज्ञापन
- Post By Admin on Jul 10 2026
मुज़फ्फरपुर: शहीद वारिस अली के सम्मान में स्टेशन रोड का नाम "शहीद वारिस अली रोड" करने, स्मारक निर्माण कराने तथा शहादत दिवस पर राजकीय श्रद्धांजलि समारोह आयोजित करने की मांग को लेकर अनजुमन-निदा-ए-अदब, मुज़फ्फरपुर के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में मुज़फ्फरपुर के सांसद एवं केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी 'निषाद' से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री से मांग की कि 14 अगस्त 2013 को मुज़फ्फरपुर नगर निगम द्वारा पारित प्रस्ताव के अनुरूप मालगोदाम चौक से मुज़फ्फरपुर स्टेशन रोड होते हुए मोतीझील तक सड़क का नाम शीघ्र "शहीद वारिस अली रोड" किया जाए। इसके साथ ही बिहार सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की ओर से 31 जनवरी 2024 को जारी निर्देश के आलोक में शहीद वारिस अली की स्मृति में लंबित स्मारक निर्माण कार्य शुरू कराया जाए तथा प्रत्येक वर्ष 6 जुलाई को उनकी शहादत दिवस पर राजकीय स्तर पर श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया जाए।
अनजुमन-निदा-ए-अदब, मुज़फ्फरपुर के चेयरमैन एवं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र असलम रहमानी ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में तिरहुत (मुज़फ्फरपुर) के प्रथम शहीद वारिस अली ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए 6 जुलाई 1857 को दानापुर छावनी कारागार में फांसी का फंदा चूमकर मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उन्होंने बताया कि वारिस अली बरूराज क्षेत्र में जमादार के पद पर कार्यरत थे और जून 1857 में विद्रोहियों का समर्थन करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए थे।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक शहीद वारिस अली के योगदान को अपेक्षित पहचान नहीं मिल सकी। वर्ष 2017 में संकल्प संस्था ने ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर उन्हें आधिकारिक रूप से शहीद का दर्जा दिलाने की पहल की। जांच के बाद संबंधित प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया और वर्ष 2019 में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा प्रकाशित "डिक्शनरी ऑफ मार्टियर्स" में उनका नाम शामिल किए जाने के बाद उन्हें स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों की सूची में आधिकारिक स्थान मिला। ज्ञापन प्राप्त करने के बाद केंद्रीय मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी ने कहा कि शहीद वारिस अली की शहादत देश के इतिहास की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस संबंध में संबंधित विभागों एवं अधिकारियों से शीघ्र बातचीत कर आवश्यक पहल की जाएगी, ताकि लंबित मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई हो सके।
प्रतिनिधिमंडल में अनजुमन-निदा-ए-अदब, मुज़फ्फरपुर के चेयरमैन एवं जेएनयू छात्र असलम रहमानी, जेएनयू के रिसर्च स्कॉलर मोहम्मद इंतखाब आलम, रिसर्च स्कॉलर अब्दुल वारिस तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के रिसर्च स्कॉलर इमामुद्दीन इमाम शामिल थे।