शहीद सफदर हाशमी की शहादत दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रम व विचार गोष्ठी

  • Post By Admin on Jan 04 2026
शहीद सफदर हाशमी की शहादत दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रम व विचार गोष्ठी

मुजफ्फरपुर : नुक्कड़ नाटक के प्रणेता शहीद सफदर हाशमी के शहादत दिवस के अवसर पर रविवार को मालीघाट स्थित मोर्चा कार्यालय, चुनाभट्टी रोड, यादवचंद्र नगर में श्रद्धांजलि एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम बिहार राज्य जनवादी सांस्कृतिक मोर्चा “विकल्प” के बैनर तले दोपहर 11 बजे से संपन्न हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत “विकल्प” की नवोदित इकाई के अध्यक्ष साथी राजू द्वारा शहीद सफदर हाशमी के चित्र पर माल्यार्पण से हुई। इसके बाद उपस्थित साथियों ने पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। जागृति इकाई के सचिव साथी विभाकर के नेतृत्व में नवोदित इकाई के कलाकारों ने “ऐ शहीदों मुल्को-मिल्लत, लीजिए मेरा सलाम” की प्रस्तुति देकर भावपूर्ण नमन किया।

शहादत दिवस के अवसर पर आयोजित विचार गोष्ठी का विषय “सफदर हाशमी : वर्तमान संदर्भ में रंगकर्म” रखा गया। गोष्ठी को संबोधित करते हुए नाट्य निर्देशक स्वाधीन दास ने कहा कि सफदर हाशमी नुक्कड़ नाटक के प्रणेता थे और आज जरूरत है कि उनके विचारों को आत्मसात करते हुए जनता के बीच जाकर जनसमस्याओं पर आधारित नाटकों की प्रस्तुति की जाए, ताकि जनवादी आंदोलन को मजबूती मिले।

प्रोफेसर कृष्णनंदन सिंह ने कहा कि सफदर हाशमी के नाटकों और लेखन से पूंजीवाद की जड़ें हिल जाती थीं। उन्होंने अपनी कलम और रंगकर्म को शोषित-पीड़ित जनता के लिए समर्पित किया। उनके जनपक्षीय संघर्ष से भयभीत होकर 01 जनवरी 1989 को उनकी निर्मम हत्या कर दी गई।

साथी दिवाकर घोष ने सत्ता के रंगकर्म द्वारा जनता के मूल्यों को कमजोर किए जाने की चर्चा करते हुए जनपक्षीय रंगकर्म को सशक्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया। सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता साथी अरविन्द कुमार ने नुक्कड़ नाटक के वर्गीय चरित्र और समकालीन संदर्भ में उसकी प्रासंगिकता को रेखांकित किया।

जनता के कलाकार साथी सुनील कुमार ने सफदर हाशमी को यादवचंद्र नगर से जोड़ते हुए कहा कि नुक्कड़ नाटक कलाकारों के लिए एक अनिवार्य माध्यम है। नाट्य निर्देशक साथी सुनील फेकानिया ने बताया कि आज भी कई कलाकार जनता के मुद्दों को लेकर सक्रिय रूप से नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से संघर्ष कर रहे हैं। इप्टा के साथी अजय विजेता ने सफदर हाशमी को उनके नाटकों के मंचन के जरिए याद रखने पर बल दिया। संगठनकर्ता साथी चंद्रमोहन प्रसाद ने नुक्कड़ नाटकों को सत्ता की साजिशों को बेनकाब करने वाला प्रभावी जन-हथियार बताया।

विचार गोष्ठी में उमेश राज, सुधीर कुमार, अली अहमद मंज़र, विभाकर विमल, बैजू कुमार, सोनू सरकार सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम के समापन पर जनकवि कुमार विरल ने कहा कि मेहनतकश जनता की कला को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए नुक्कड़ नाटकों को मजबूत करना जरूरी है। अध्यक्षीय संबोधन में साथी कामेश्वर प्रसाद दिनेश ने शहर में एक सशक्त सांस्कृतिक आंदोलन खड़ा करने के लिए सभी सांस्कृतिक संगठनों से एकजुट होने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में विनोद कुमार रजक, आनंद, चंद्रशेखर आजाद, शंभू मोहन प्रसाद, हिमांशु कुमार, रामबाबू, एम. हसन, रंधीर, रुखसार, रोशनी प्रवीण, नाजरीन खातून, लाडो, निशा, रिया, रोमा, मानसी, रिंकी देवी, धीरेन्द्र, अंशिका, सौम्या, पुष्पांजलि, बिंदिया सहित बड़ी संख्या में सांस्कृतिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। मंच संचालन साथी बैजू कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन मालीघाट इकाई की सचिव साथी पूजा ने किया।