बिहार में पशुपालन मित्रों की होगी जल्द बहाली, गांव में रोजगार के मिलेंगे अवसर
- Post By Admin on Feb 17 2026
पटना: ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और पशुपालकों को सुलभ पशु स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पशुपालन विभाग द्वारा पशुपालन मैत्री योजना शुरू करने की तैयारी की जा रही है। योजना के माध्यम से पंचायत स्तर पर स्थानीय युवाओं को जोड़कर उन्हें स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे, वहीं पशुपालकों को घर के समीप ही आवश्यक सेवाएं मिल सकेंगी।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, योजना का लक्ष्य पशुपालन गतिविधियों को वैज्ञानिक आधार पर सशक्त बनाना है। इसके तहत चयनित युवाओं को पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान, सामान्य रोगों की पहचान तथा प्राथमिक उपचार से संबंधित निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद उन्हें आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था प्रस्तावित है, ताकि वे पंचायत स्तर पर सेवाएं दे सकें। प्रावधान के अनुसार प्रत्येक पंचायत में कम से कम एक और अधिकतम तीन पशुपालन मैत्री नियुक्त किए जाएंगे। चयनित युवा अपने ही पंचायत अथवा आसपास के क्षेत्रों में कार्य करेंगे। इससे पशुपालकों को कृत्रिम गर्भाधान और पशु उपचार जैसी सेवाओं के लिए दूर-दराज नहीं जाना पड़ेगा। समय पर उपचार एवं गर्भाधान सेवाओं से पशुओं की उत्पादकता में सुधार और दूध उत्पादन में वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि योजना का उद्देश्य दोहरा है। एक ओर पशुपालकों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराना, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण युवाओं को रोजगार से जोड़ना। पशुपालन मैत्री विभाग और पशुपालकों के बीच संपर्क सूत्र के रूप में कार्य करेंगे तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी गांव स्तर तक पहुंचाने में सहायक होंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राज्यभर में पशुपालन मैत्री की बहाली प्रक्रिया आगामी दो महीनों के भीतर नियमों के अनुरूप पूरी किए जाने की संभावना है। चयन के लिए किसी भी विषय से मैट्रिक उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को पात्र माना जा सकता है। बहाली के बाद प्रशिक्षण की जिम्मेदारी विभाग द्वारा निभाई जाएगी।
मानदेय को लेकर भी विचार-विमर्श जारी है। विभागीय स्तर पर मध्यप्रदेश की तर्ज पर पशुपालन मैत्री को मासिक मानदेय देने की योजना पर चर्चा हो रही है। बताया जा रहा है कि संभावित रूप से मानदेय राशि को राज्य की अन्य अनुदेशक योजनाओं के अनुरूप निर्धारित करने पर विचार किया जा रहा है। आपको बताते चलें कि अनुदेशक को अभी 8000 मासिक मानदेय दिया जाता है।
वेटनरी साइंस में पूर्व से सर्टिफिकेट या डिप्लोमा कर चुके अभ्यर्थियों को चयन में प्राथमिकता देने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही चयन प्रक्रिया एवं शर्तों की स्पष्ट जानकारी सामने आएगी। योजना के क्रियान्वयन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती, पशुपालकों की आय में वृद्धि और पंचायत स्तर पर बेरोजगारी में कमी की उम्मीद की जा रही है।