राजद में मचा घमासान : भाई वीरेंद्र का सियासी बम – "कुछ नेताओं को सिर्फ पैसा कमाने की भूख”
- Post By Admin on Aug 08 2026
पटना : राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र ने एक बार फिर पार्टी संगठन और बिहार की कानून-व्यवस्था को लेकर तीखा बयान देकर सियासी हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि पार्टी में कुछ लोगों को “पैसा कमाने की भूख” लगी हुई है और उनका स्वभाव कभी सुधरने वाला नहीं है।
भाई वीरेंद्र ने संकेत दिया कि पार्टी संगठन में जल्द ही नई कमेटी का गठन होगा और उसके संबंध में अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व करेगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में राजद के अंदरूनी मतभेदों की चर्चाएं तेज रही हैं। विशेष रूप से पार्टी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव और भाई वीरेंद्र के बीच सार्वजनिक बयानबाजी ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा था।
गौरतलब है कि बांकीपुर उपचुनाव के परिणामों के बाद भाई वीरेंद्र ने पार्टी संगठन की कार्यशैली और तेजस्वी यादव के आसपास सक्रिय कुछ नेताओं पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि चुनाव परिणामों की गंभीर समीक्षा होनी चाहिए और ऐसे लोगों को संगठन से बाहर किया जाना चाहिए जिनकी वजह से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंच रहा है। हालांकि उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया था, लेकिन उस समय शक्ति सिंह यादव का नाम चर्चा में आया था। इसके बाद शक्ति सिंह यादव ने पलटवार करते हुए भाई वीरेंद्र से पूछा था कि उन्होंने पार्टी के लिए क्या योगदान दिया है। इस बयान के बाद दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई थी। अब भाई वीरेंद्र के ताजा बयान को उसी विवाद की अगली कड़ी माना जा रहा है।
वहीं भाई वीरेंद्र ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा सीवान में एके-47 बरामदगी और बिहार में बढ़ते अपराध के मुद्दे को उठाने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि राज्य में पत्रकार, किसान और आम नागरिक कोई भी सुरक्षित नहीं है तथा लगातार हत्या और आपराधिक घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई में सरकार गंभीरता नहीं दिखा रही है और कई मामलों में गिरफ्तारियां भी प्रभावी ढंग से नहीं हो रही हैं। भाई वीरेंद्र ने कहा कि मुख्यमंत्री से कई बार अपराध नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की गई है, क्योंकि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
राजद विधायक के इस बयान को पार्टी के अंदर चल रही खींचतान और बिहार की कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष के बढ़ते हमलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान आने वाले दिनों में राजद के भीतर संगठनात्मक बहस को और तेज कर सकते हैं।