कोलोरेक्टल कैंसर जागरूकता माह: 1 से 30 मार्च तक जिले में चलेगा विशेष अभियान

  • Post By Admin on Mar 01 2026
कोलोरेक्टल कैंसर जागरूकता माह: 1 से 30 मार्च तक जिले में चलेगा विशेष अभियान

लखीसराय : बड़ी आंत (कोलन) और मलाशय (रेक्टम) से जुड़े कोलोरेक्टल कैंसर के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से 1 से 30 मार्च तक जिले में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान आमजनों को समय पर जांच और उपचार के लिए प्रेरित किया जाएगा।

सदर अस्पताल में तैनात चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. निशांत निराला ने बताया कि कोलोरेक्टल कैंसर बड़ी आंत की भीतरी परत की कोशिकाओं के अनियंत्रित रूप से बढ़ने के कारण होता है। अधिकतर मामलों में यह बीमारी छोटे पॉलिप्स (कोशिकाओं के असामान्य समूह) से शुरू होती है, जो समय के साथ कैंसर में परिवर्तित हो सकते हैं और आंत की दीवार, आसपास के लसीका ग्रंथियों (लिंफ नोड्स) तथा शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकते हैं।

उन्होंने बताया कि पॉलिप्स मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं— एडिनोमेटस पॉलिप (एडिनोमा), जो कैंसर में बदल सकते हैं, तथा हाइपरप्लास्टिक एवं सूजन संबंधी पॉलिप्स, जो सामान्यतः कैंसर में परिवर्तित नहीं होते। पॉलिप्स के आकार, प्रकार और संख्या के आधार पर कैंसर बनने की संभावना निर्धारित होती है।

डॉ. निराला ने कहा कि विश्व स्तर पर कोलोरेक्टल कैंसर तीसरा सबसे आम कैंसर है। हर वर्ष लगभग 18 लाख नए मामले सामने आते हैं और करीब 8.62 लाख लोगों की मृत्यु इस बीमारी के कारण होती है। जीवनकाल में प्रत्येक 20 में से एक व्यक्ति को इस कैंसर का जोखिम रहता है।

उन्होंने बताया कि इसके प्रमुख जोखिम कारकों में बढ़ती उम्र, अधिक वसा एवं लाल मांस वाला आहार, कम फाइबर का सेवन, धूम्रपान, शराब, मोटापा, मधुमेह, शारीरिक निष्क्रियता, आंतों की सूजन संबंधी बीमारियां (अल्सरेटिव कोलाइटिस और क्रोहन रोग) तथा पारिवारिक इतिहास शामिल हैं।

इसके लक्षणों में मल त्याग की आदतों में बदलाव, लगातार दस्त या कब्ज, पेट दर्द, कमजोरी, वजन कम होना, खून की कमी (एनीमिया) और मल में खून आना प्रमुख हैं। जांच के लिए मल में छिपे खून की जांच (एफओबीटी), कोलोनोस्कोपी और बायोप्सी महत्वपूर्ण विधियां हैं।

उन्होंने बताया कि कैंसर का इलाज उसके चरण और स्थान पर निर्भर करता है। प्रारंभिक अवस्था में शल्य चिकित्सा मुख्य उपचार है, जिसमें प्रभावित हिस्से को लसीका ग्रंथियों सहित हटाया जाता है। इसके अलावा कीमोथेरेपी, लक्षित चिकित्सा, प्रतिरक्षा चिकित्सा और विकिरण चिकित्सा का भी उपयोग किया जाता है।

45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों एवं जोखिम समूह में शामिल व्यक्तियों को नियमित जांच कराने की सलाह दी गई है। उन्होंने बताया कि सदर अस्पताल सहित जिले के विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित रूप से कैंसर स्क्रीनिंग की सुविधा उपलब्ध है। समय पर पहचान और उपचार से कोलोरेक्टल कैंसर का सफल इलाज संभव है।