सीबीएसई में बड़ा बदलाव: 12वीं बोर्ड की कॉपियों की जांच अब ऑन-स्क्रीन, पारदर्शिता और सटीकता पर जोर
- Post By Admin on Feb 02 2026
नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में इस वर्ष से बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। बोर्ड सूत्रों के अनुसार, अब कॉपियों की जांच फिजिकल मोड के बजाय ऑन-स्क्रीन मार्किंग के माध्यम से की जाएगी। इस प्रक्रिया के लिए उपयुक्त एजेंसी के चयन की कवायद शुरू हो चुकी है और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि निष्पक्षता और एकरूपता सुनिश्चित की जा सके।
बोर्ड द्वारा जारी सख्त मार्किंग स्कीम के तहत परीक्षक ऑन-स्क्रीन ही उत्तरों का मूल्यांकन करेंगे। सही स्टेप्स और निर्धारित कीवर्ड्स के आधार पर अंक दिए जाएंगे, जिससे छात्रों को स्टेप-मार्किंग का पूरा लाभ मिलेगा। सीबीएसई का मानना है कि इस व्यवस्था से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि मानवीय त्रुटियां भी कम होंगी और मूल्यांकन की सटीकता बढ़ेगी। यदि कक्षा 12वीं में यह मॉडल सफल रहता है, तो अगले वर्ष से इसे 10वीं बोर्ड परीक्षा की कॉपियों की जांच में भी लागू किया जा सकता है।
क्रॉस-चेकिंग और मॉडरेशन होगा और तेज
डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के तहत आंसर शीट्स को स्कैन कर परीक्षकों को कंप्यूटर स्क्रीन पर उपलब्ध कराया जाएगा। शिक्षक वहीं से अंक देंगे और पूरी प्रक्रिया डिजिटल रिकॉर्ड में सुरक्षित रहेगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप इस कदम का उद्देश्य छात्रों को रटने के बजाय समझकर उत्तर लिखने के लिए प्रोत्साहित करना है। बोर्ड का दावा है कि ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन से अलग-अलग शिक्षकों द्वारा एक ही उत्तर पर अलग अंक दिए जाने की संभावना घटेगी, क्रॉस-चेकिंग और मॉडरेशन पहले से कहीं अधिक तेज होगी और परिणाम जल्द घोषित किए जा सकेंगे। स्कैन कॉपियों पर होने वाली मार्किंग से पूरी प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी बनेगी।
कक्षा 6 से 8 तक कौशल शिक्षा अनिवार्य
इसी क्रम में सीबीएसई ने एक और अहम निर्णय लेते हुए अपने से संबद्ध विद्यालयों में कक्षा 6 से 8 तक कौशल शिक्षा को अनिवार्य कर दिया है। पहले यह विषय विकल्प के रूप में पढ़ाया जाता था, लेकिन अब इसे नियमित पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। कौशल शिक्षा के प्रभावी संचालन के लिए संबंधित कक्षाओं के शिक्षकों को ऑफलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा। बोर्ड का मानना है कि इससे छात्रों में रचनात्मक सोच, समस्या समाधान, व्यावहारिक समझ और आत्मनिर्भरता जैसे गुण विकसित होंगे, जो भविष्य में उन्हें रोजगार और जीवन कौशल के लिहाज से अधिक सक्षम बनाएंगे।
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