चीन-पाक के छूटेंगे पसीने : 114 नए राफेल से भारतीय वायुसेना बनेगी सुपर पावर
- Post By Admin on Feb 06 2026
नई दिल्ली : रक्षा बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बाद भारत अब अपनी वायुसेना को अभूतपूर्व ताकत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। चीन और पाकिस्तान के बढ़ते सैन्य गठजोड़ तथा क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत फ्रांस के साथ एक ऐतिहासिक रक्षा सौदे की तैयारी में है। सरकार भारतीय वायुसेना के बेड़े में 114 नए राफेल लड़ाकू विमान शामिल करने के प्रस्ताव पर तेजी से आगे बढ़ रही है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपए बताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के प्रस्तावित भारत दौरे से पहले इस मेगा डील को लेकर रक्षा मंत्रालय में उच्चस्तरीय बैठकों का दौर शुरू हो गया है। मैक्रों फरवरी के तीसरे सप्ताह में नई दिल्ली में आयोजित एआई समिट में हिस्सा लेने आ रहे हैं। इससे पहले अगले सप्ताह रक्षा मंत्रालय की अहम बैठक में राफेल सौदे पर अंतिम रणनीति पर चर्चा की जाएगी। भारतीय वायुसेना के इस प्रस्ताव को रक्षा खरीद बोर्ड से प्रारंभिक मंजूरी मिल चुकी है।
इस सौदे की सबसे बड़ी खासियत ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देना है। प्रस्ताव के तहत 114 राफेल विमानों में से करीब 80 प्रतिशत का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इनमें 88 सिंगल-सीटर और 26 ट्विन-सीटर विमान शामिल होंगे। फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन और भारतीय निजी कंपनियों के सहयोग से इन विमानों का निर्माण किया जाएगा। डील पूरी होने के बाद भारतीय वायुसेना के पास कुल राफेल विमानों की संख्या करीब 150 हो जाएगी, जबकि नौसेना के पास पहले से 26 राफेल मरीन विमान होंगे।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह सौदा भारतीय वायुसेना की ऑपरेशनल जरूरतों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। फिलहाल वायुसेना के पास सिर्फ 30 स्क्वाड्रन सक्रिय हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 है। पाकिस्तान और चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के साथ-साथ बांग्लादेश के साथ बदलते समीकरणों ने सुरक्षा चुनौतियों को और गंभीर बना दिया है। ऐसे में 4.5-जेनरेशन प्लस मल्टीरोल फाइटर जेट्स की यह खरीद वायुसेना की ताकत को लंबे समय तक मजबूत बनाएगी।
गौरतलब है कि सरकार ने हालिया बजट में रक्षा मंत्रालय के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजट 7.85 लाख करोड़ रुपए तय किया है, जो कुल बजट का 14.68 प्रतिशत है। यह पिछले साल की तुलना में करीब 15 प्रतिशत अधिक है। आंकड़ों के मुताबिक, 2021-22 में रक्षा बजट 4.84 लाख करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 7.85 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। इससे साफ है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य आधुनिकीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।