शोध गुणवत्ता में बीआरए बिहार विश्वविद्यालय की बड़ी छलांग, साइटेशन सूचकांक 2000 के पार
- Post By Admin on Jul 14 2026
मुजफ्फरपुर : बीआर आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू) में शोध एवं अकादमिक गुणवत्ता को लेकर किए गए नीतिगत सुधारों का सकारात्मक असर अब वैश्विक शोध सूचकांकों में भी दिखाई देने लगा है। आधिकारिक स्कोपस डेटाबेस के ताजा आंकड़ों के अनुसार विश्वविद्यालय के शोध पत्रों के साइटेशन (वैश्विक संदर्भ) में लगातार उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में विश्वविद्यालय का साइटेशन सूचकांक 2000 के पार पहुंच गया है।
जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में विश्वविद्यालय का कुल साइटेशन लगभग 900 था, जो वर्ष 2024 में बढ़कर 1600 से अधिक हो गया। वहीं, वर्ष 2025 के नवीनतम आंकड़ों में यह संख्या 2000 के पार दर्ज की गई है। इसी अवधि में शोध प्रकाशनों की संख्या में भी निरंतर वृद्धि हुई है। वर्ष 2023 में 65 शोध पत्र प्रकाशित हुए थे, जो वर्ष 2024 में बढ़कर 73 और वर्ष 2025 में 81 तक पहुंच गए।
इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय ने कहा कि वैश्विक शोध सूचकांक में दर्ज यह वृद्धि विश्वविद्यालय द्वारा अनुसंधान के क्षेत्र में किए गए सतत प्रयासों और नीतिगत सुधारों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल शोध पत्रों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता, अकादमिक शुचिता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता सुनिश्चित करना है। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय को केवल ज्ञान अर्जन का केंद्र नहीं, बल्कि नए ज्ञान के सृजन का वैश्विक मंच बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में विश्वविद्यालय का विशेष फोकस पेटेंट, बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर), मौलिक नवाचार और परिसर में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने पर रहेगा।
आईक्यूएसी के निदेशक प्रो. नवेदुल हक ने कहा कि शोध मानकों को सुदृढ़ करने और नीतिगत सुधार लागू करने से विश्वविद्यालय को आगामी नैक (NAAC) मूल्यांकन और एनआईआरएफ (NIRF) रैंकिंग में भी लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि कुलपति स्वयं उच्च स्तरीय शोध कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और युवा शोधकर्ताओं का मार्गदर्शन कर परिसर में अनुसंधान का सकारात्मक वातावरण तैयार कर रहे हैं।विश्वविद्यालय की इस उपलब्धि पर शिक्षकों, शोधार्थियों, शैक्षणिक समुदाय और एलुमनी एसोसिएशन ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे संस्थान की अकादमिक प्रगति की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।