महिला जनप्रतिनिधियों की जगह पति चला रहे सत्ता, भाकपा ने खोली पंचायत व्यवस्था की पोल
- Post By Admin on May 31 2026
लखीसराय : जिला परिषद कार्यालय, लखीसराय में बीते 30 मई को हुई आपराधिक घटना को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने प्रशासन और पंचायत राज व्यवस्था पर तीखा सवाल उठाया है। पार्टी ने जारी वक्तव्य में कहा है कि यह घटना प्रशासनिक अकर्मण्यता, अदूरदर्शिता और भ्रष्ट नीतियों का प्रत्यक्ष परिणाम है।
भाकपा ने आरोप लगाया कि विकास योजनाओं में फर्जी विपत्रों के माध्यम से राशि गबन को लेकर उत्पन्न विवाद ने त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है। पार्टी के अनुसार पंचायत राज व्यवस्था में निर्वाचित सदस्यों के किसी “प्रतिनिधि” का कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद महिला जनप्रतिनिधियों के पति स्वयंभू प्रतिनिधि बनकर जिला परिषद के कार्यों में हस्तक्षेप कर रहे हैं और अप्रत्यक्ष रूप से ठेकेदार तथा सत्ता संचालक की भूमिका निभा रहे हैं। पार्टी ने कहा कि निष्पक्ष जांच होने पर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। भाकपा ने सवाल उठाया कि सदस्य प्रतिनिधियों और उनके समर्थकों की जिला परिषद कार्यालय में क्या भूमिका थी, अध्यक्षा की अनुपस्थिति में उनके पति किस अधिकार से कार्यालय में मौजूद थे तथा योजना संबंधी फाइलों की मांग किस हैसियत से की जा रही थी। साथ ही कार्यालय में हुई आपराधिक घटना के बावजूद संबंधित अधिकारियों या कर्मियों द्वारा प्राथमिकी दर्ज नहीं कराने पर भी सवाल खड़े किए गए।
भाकपा ने इस मामले को महिला सशक्तिकरण से भी जोड़ते हुए कहा कि आरक्षित सीटों से निर्वाचित महिलाओं की सत्ता संचालन में प्रत्यक्ष भागीदारी बेहद सीमित है, जबकि वास्तविक नियंत्रण अब भी पुरुषों के हाथों में केंद्रित दिखाई देता है। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताते हुए कहा कि लोकतंत्र के नाम पर “प्रतिनिधि पति तंत्र” चलाया जा रहा है। वक्तव्य के अंत में भाकपा ने जनभावनाओं का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जब निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका स्पष्ट है, तो फिर गैर-निर्वाचित लोगों का सरकारी कार्यालयों और निर्णय प्रक्रिया में हस्तक्षेप किस आधार पर हो रहा है। पार्टी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।