अहमदाबाद ब्लास्ट केस : हाईकोर्ट ने बरकरार रखी 38 आतंकियों की फांसी
- Post By Admin on Jul 07 2026
अहमदाबाद : वर्ष 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए विशेष अदालत द्वारा 38 दोषियों को दी गई फांसी की सजा और 11 अन्य दोषियों की उम्रकैद को बरकरार रखा है। अदालत ने पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे का भी आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि हमले में जान गंवाने वाले 56 लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए तथा 200 से अधिक घायलों को एक-एक लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए।
दरअसल, वर्ष 2022 में विशेष अदालत ने 14 वर्षों तक चली सुनवाई के बाद इस मामले को 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (रेयरेस्ट ऑफ रेयर) मानते हुए 38 दोषियों को फांसी और 11 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। कानून के तहत फांसी की सजा पर अमल से पहले हाईकोर्ट की पुष्टि आवश्यक होती है। इसी कारण दोषियों ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी, जबकि राज्य सरकार ने भी सजा की पुष्टि के लिए याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष अदालत के फैसले पर मुहर लगा दी।
गौरतलब है कि 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद शहर में महज 70 मिनट के भीतर 21 सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन विस्फोटों में 56 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। आतंकियों ने नरोदा, बापूनगर, सरखेज और हटकेश्वर जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों को निशाना बनाया था। जांच में सामने आया था कि बमों को साइकिलों पर रखे टिफिन बॉक्स में छिपाकर विभिन्न स्थानों पर रखा गया था। सार्वजनिक स्थलों और बाजारों के अलावा अहमदाबाद म्युनिसिपल ट्रांसपोर्ट सर्विस (एएमटीएस) की बसों में भी विस्फोट किए गए थे। इतना ही नहीं, शुरुआती धमाकों के करीब 40 मिनट बाद दो अस्पताल परिसरों में भी बम विस्फोट किए गए, जहां घायल लोगों का इलाज चल रहा था। इस हमले को देश के सबसे भयावह आतंकी हमलों में से एक माना जाता है।