सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर कोचिंग कानून को लेकर अंबाजी में मंथन, फेडरेशन ऑफ एकेडमिक एसोसिएशन ने रखे सुझाव
- Post By Admin on Jan 24 2026
अहमदाबाद: माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में गुजरात सरकार द्वारा कोचिंग क्लासेस के लिए प्रस्तावित कानून बनाए जाने की प्रक्रिया को लेकर अंबाजी में फेडरेशन ऑफ एकेडमिक एसोसिएशन की ओर से एक महत्वपूर्ण महाधिवेशन का आयोजन किया गया। इस बैठक में प्रस्तावित कानून के संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई और सरकार को दिए जाने वाले सकारात्मक सुझावों पर गहन मंथन हुआ।
महाधिवेशन का नेतृत्व फेडरेशन ऑफ एकेडमिक एसोसिएशन के अध्यक्ष हेमांग रावल ने किया। बैठक में कोचिंग क्लासेस से जुड़े विभिन्न पहलुओं, मौजूदा चुनौतियों और भविष्य में लागू होने वाले नियमों के असर पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक के समापन के बाद फेडरेशन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अपने आधिकारिक रुख और पारित प्रस्तावों की जानकारी दी। फेडरेशन ने मांग की कि सरकार द्वारा गठित की जाने वाली समिति में उसके चार प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए, ताकि कोचिंग क्लासेस एसोसिएशन को एक स्टेकहोल्डर के रूप में अपने न्यायिक और व्यावहारिक हितों को रखने का अवसर मिल सके। साथ ही, सरकार द्वारा जल्द प्रस्तुत किए जाने वाले कानून के ड्राफ्ट को लेकर फेडरेशन ने अपने स्तर पर सकारात्मक सुझाव भी तैयार किए हैं। इसके लिए 17 सदस्यों की एक विशेष ड्राफ्ट समिति का गठन किया गया है, जो प्रस्तावित कानून के विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रही है।
फेडरेशन का मानना है कि कोचिंग सेंटर्स की परिभाषा स्पष्ट होनी चाहिए और इसमें ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पढ़ाने वाले, यहां तक कि घर या समूह में शिक्षण कार्य करने वालों को भी पंजीकरण के दायरे में लाया जाना चाहिए। संगठन ने यह भी कहा कि जहां विद्यार्थियों की उपस्थिति सीमित समय की हो, वहां इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े नियमों में व्यवहारिक छूट दी जानी चाहिए। इसके साथ ही 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को फाउंडेशन के नाम पर किसी भी ट्यूशन या कोर्स में प्रवेश न देने की बात पर भी सहमति बनी। बैठक में आय-व्यय की पारदर्शिता के लिए आयकर कानून के अनुरूप सीए ऑडिट अनिवार्य करने, जिला और तालुका स्तर पर कार्यान्वयन समितियों में फेडरेशन से जुड़े प्रतिनिधियों को शामिल करने और शिकायतों व निरीक्षण की प्रक्रिया में फेडरेशन की भागीदारी सुनिश्चित करने जैसे सुझाव रखे गए। इसके अलावा शहर, तालुका, जिला और राज्य स्तर पर शिकायत निवारण एवं अपील प्राधिकरण के गठन की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
फेडरेशन ने यह भी सुझाव दिया कि जीएसटी की तर्ज पर एक बार प्रशासनिक शुल्क लेकर स्थायी पंजीकरण की व्यवस्था की जाए, ताकि बार-बार होने वाली प्रक्रियाओं से राहत मिल सके। कई स्थानों पर शाखाएं संचालित करने वाले कोचिंग सेंटर्स के लिए अलग-अलग पंजीकरण की व्यवस्था और छोटे स्तर पर संचालित कोचिंग सेंटर्स को कुछ तकनीकी बाध्यताओं से छूट देने की भी मांग की गई। फीस रिफंड से जुड़े मामलों में छात्रों पर हुए वास्तविक खर्च घटाने के बाद शेष राशि लौटाने का स्पष्ट प्रावधान करने, मेधावी छात्रों के लिए अलग बैच के बजाय कमजोर छात्रों के लिए अतिरिक्त कक्षाओं की व्यवस्था करने और कोचिंग सेंटर्स को राज्य सरकार द्वारा “शैक्षणिक संस्था” का दर्जा देने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बड़े कोचिंग सेंटर्स में मानसिक काउंसलर की व्यवस्था और स्कूलों के समय निर्धारण के बाद ही कोचिंग के समय तय करने की आवश्यकता पर भी फेडरेशन ने जोर दिया।
अंबाजी में आयोजित इस महाधिवेशन में पूरे गुजरात से आए 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में यह विश्वास जताया गया कि यदि प्रस्तावित कानून में इन सुझावों को शामिल किया जाता है, तो कोचिंग क्षेत्र को एक संतुलित, पारदर्शी और व्यावहारिक दिशा मिलेगी, जिससे विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों सभी के हित सुरक्षित रहेंगे।