वीर क्रांतिकारी जुब्बा साहनी की शहादत दिवस पर नमन, स्वतंत्रता संग्राम में निभाई थी अग्रणी भूमिका
- Post By Admin on Mar 11 2026
मुजफ्फरपुर : भारत के स्वतंत्रता संग्राम के वीर क्रांतिकारियों में शामिल जुब्बा साहनी की शहादत दिवस पर बुधवार को उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर प्रखंड अंतर्गत चैनपुर बस्ती में वर्ष 1906 में जन्मे जुब्बा साहनी को राज्य के सबसे साहसी स्वतंत्रता सेनानियों में गिना जाता है। ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए उन्हें 11 मार्च 1944 को भागलपुर केंद्रीय कारागार में फांसी दे दी गई थी। उस समय उनकी आयु लगभग 38 वर्ष थी।
बताया जाता है कि एक गरीब मल्लाह परिवार में जन्मे जुब्बा साहनी के पिता का नाम पचू साहनी था। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आह्वान पर कई आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी निभाई। उन्होंने नमक सत्याग्रह, शराबबंदी आंदोलन, विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार और हरिजन उत्थान जैसे अभियानों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्हें 1932, 1934 और 1942 में कई बार जेल भी जाना पड़ा।
दिसंबर 1932 में मुजफ्फरपुर के सरैयागंज क्षेत्र में एक शराब की दुकान के विरोध में धरना देते समय ब्रिटिश पुलिस की गोली से वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिससे उनकी बाईं पसली की तीन हड्डियां टूट गई थीं। इसके बावजूद उनका संघर्ष जारी रहा।
सन् 1930 के नमक आंदोलन से लेकर भारत छोड़ो आंदोलन तक उनकी क्रांतिकारी गतिविधियां लगातार तेज होती गईं। अगस्त 1942 में उनके नेतृत्व में सरकारी कार्यालयों, डाकघरों और पुलिस थानों पर तिरंगा फहराने तथा ब्रिटिश शासन के प्रतीकों के खिलाफ आंदोलन चलाया गया।
16 अगस्त 1942 को उन्होंने मीनापुर थाना के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह का नेतृत्व किया, जिसमें थाना प्रभारी की मौत हो गई। इस घटना की पूरी जिम्मेदारी जुब्बा साहनी ने स्वयं ली। इसके बाद ब्रिटिश सरकार द्वारा गठित विशेष अदालत ने उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई और 11 मार्च 1944 को भागलपुर केंद्रीय जेल में उन्हें फांसी दे दी गई।
उनकी शहादत की स्मृति में मुजफ्फरपुर में जुब्बा साहनी पार्क तथा जुब्बा साहनी रेलवे स्टेशन का नाम उनके सम्मान में रखा गया है। वहीं जिस जेल में उन्हें फांसी दी गई थी, उसे बाद में जुब्बा साहनी सेंट्रल जेल नाम दिया गया। इसके अलावा वैशाली जिले में स्थित बरेला सलीम अली–जुब्बा साहनी पक्षी अभयारण्य भी उनके नाम से जुड़ा हुआ है।
मार्च 2023 में पटना में जुब्बा साहनी की आदमकद प्रतिमा वाला एक पार्क भी स्थापित किया गया, जिसका अनावरण बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था। इस अवसर पर स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
स्वतंत्रता संग्राम में अपने अदम्य साहस और बलिदान के लिए जुब्बा साहनी आज भी बिहार सहित पूरे देश में वीर क्रांतिकारी के रूप में सम्मान के साथ याद किए जाते हैं।