पटना में मंचित हुआ 'तोता द पैरट स्टोरी', शिक्षा व्यवस्था पर तीखा सवाल छोड़ गया नाटक
- Post By Admin on Jun 28 2026
पटना: किलकारी, बिहार बाल भवन के मंच पर अक्षरा आर्ट्स की प्रस्तुति 'तोता – द पैरट स्टोरी' ने दर्शकों को शिक्षा व्यवस्था की वास्तविकताओं पर गंभीरता से सोचने के लिए मजबूर कर दिया। रवीन्द्रनाथ टैगोर की कालजयी रूपक कथा 'तोता' पर आधारित इस नाटक का मंचन क़िस्सा ख्वानी और फोरम थिएटर की अनूठी शैली में किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
नाटक की शुरुआत बेहद सादगीपूर्ण मंच सज्जा के साथ हुई, जहां बिना किसी भव्य सेट या तकनीकी चकाचौंध के केवल दो कलाकार—संतोष राणा और अजीत कुमार—ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से पूरे सभागार को बांधे रखा। पहले ही संवाद से दर्शक कहानी से इस तरह जुड़ गए कि उन्हें यह कथा अपने समय और समाज की कहानी प्रतीत होने लगी। नाटक में 'अनुशासन भूमि' के राजा, उनके भांजे, विद्वानों और एक मासूम तोते की कथा के माध्यम से वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य किया गया। सोने के पिंजरे, पोथियों के बोझ और अनुशासन के नाम पर जिज्ञासा के दमन को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत करते हुए यह संदेश दिया गया कि आज का बच्चा कहीं न कहीं उसी तोते की तरह बनता जा रहा है, जिसकी स्वाभाविक प्रतिभा और स्वतंत्र सोच को व्यवस्था कुचल देती है।
मंचन के दौरान कलाकारों ने दर्शकों से सीधे संवाद स्थापित किए और कई महत्वपूर्ण सवाल भी पूछे। जब मंच से यह प्रश्न उठा कि "क्या पढ़ाई का मतलब केवल परीक्षा पास करना है?", तो पूरा सभागार कुछ क्षणों के लिए शांत हो गया। फोरम थिएटर की शैली ने दर्शकों को केवल दर्शक नहीं रहने दिया, बल्कि उन्हें नाटक का सहभागी बना दिया। संतोष राणा और अजीत कुमार ने राजा, विद्वान और तोते सहित अनेक पात्रों को सहजता से जीवंत किया। उनकी अभिनय क्षमता और किस्सागोई शैली ने प्रस्तुति को प्रभावशाली बना दिया। साधना कुमारी के संगीत, अभिषेक के ध्वनि संयोजन तथा राजकपूर की प्रकाश परिकल्पना ने नाटक की संवेदनाओं को और अधिक प्रभावी बनाया। मंच पार्श्व की जिम्मेदारी अजीत कुमार ने संभाली। इस प्रस्तुति का आयोजन किलकारी, बिहार बाल भवन, पटना एवं टीचर्स ऑफ बिहार के सहयोग से किया गया। नाटक समाप्त होने के बाद भी बड़ी संख्या में दर्शक कलाकारों से चर्चा करते रहे। कई शिक्षकों ने इस नाटक का मंचन स्कूलों और कॉलेजों में कराने की मांग की, ताकि विद्यार्थी भी शिक्षा व्यवस्था पर गंभीरता से विचार कर सकें।
'तोता – द पैरट स्टोरी' केवल एक नाटक नहीं, बल्कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था का आईना बनकर सामने आया। अक्षरा आर्ट्स की इस प्रस्तुति ने यह साबित किया कि संवेदनशील विषय, सशक्त अभिनय और ईमानदार प्रस्तुति किसी भी भव्य मंच सज्जा से कहीं अधिक प्रभाव छोड़ सकती है।