अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर विशेष कार्यक्रम, विद्यार्थियों ने जाना इतिहास और विरासत का महत्व

  • Post By Admin on May 18 2026
अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर विशेष कार्यक्रम, विद्यार्थियों ने जाना इतिहास और विरासत का महत्व

लखीसराय : अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर लखीसराय संग्रहालय में विद्यार्थियों के लिए विशेष शैक्षणिक एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन के साथ हुई।

कार्यक्रम के दौरान जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सह सहायक संग्रहालयाध्यक्ष मृणाल रंजन ने छात्र-छात्राओं को अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के महत्व और संग्रहालयों की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक वर्ष 18 मई को मनाए जाने वाले इस दिवस की शुरुआत वर्ष 1977 में इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ म्यूज़ियम्स द्वारा की गई थी। इस वर्ष का विषय “विभाजित विश्व को एक सूत्र में जोड़ते संग्रहालय” रखा गया है, जिसका उद्देश्य संग्रहालयों को संवाद, शिक्षा, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता के केंद्र के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि संग्रहालय केवल प्राचीन वस्तुओं के संरक्षण का स्थान नहीं हैं, बल्कि समाज को उसके इतिहास, कला, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने वाले जीवंत शैक्षणिक संस्थान भी हैं।

इसके बाद विद्यार्थियों को पावर पॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से लखीसराय संग्रहालय का परिचय कराया गया। प्रस्तुति में बताया गया कि यह एक “साइट संग्रहालय” है, जहां प्रदर्शित सभी पुरावशेष स्थानीय क्षेत्र से प्राप्त हुए हैं। विद्यार्थियों को लखीसराय और आसपास के क्षेत्रों की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों की जानकारी भी दी गई।कार्यक्रम के अगले चरण में विद्यार्थियों को संग्रहालय की विभिन्न दीर्घाओं का भ्रमण कराया गया। इस दौरान उन्हें प्रसिद्ध शालभंजिका प्रतिमा, प्राचीन मृद्भांड, पाषाण प्रतिमाओं और अन्य महत्वपूर्ण पुरावशेषों के बारे में विस्तार से बताया गया। संग्रहालय कर्मियों ने प्रत्येक कलाकृति और पुरावशेष की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तथा सांस्कृतिक महत्व को सरल और रोचक तरीके से समझाया। विद्यार्थियों ने भी उत्साह और जिज्ञासा के साथ इन धरोहरों को देखा और उनसे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों की जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम के समापन पर बिहार गीत का सामूहिक गायन किया गया तथा सभी छात्र-छात्राओं को अल्पाहार और जलपान उपलब्ध कराया गया। इस अवसर पर सहायक संग्रहालयाध्यक्ष ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत, इतिहास और पुरातात्त्विक धरोहरों के प्रति जागरूक करना है, ताकि उनमें संरक्षण और संवर्धन की भावना विकसित हो सके। विद्यार्थियों ने संग्रहालय भ्रमण को ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक अनुभव बताया।