राजकीय डिग्री महाविद्यालय मधुबन में "संस्कृत साहित्य में योग का वैश्विक वैशिष्ट्य" विषय पर संगोष्ठी आयोजित

  • Post By Admin on Jun 25 2026
राजकीय डिग्री महाविद्यालय मधुबन में

मधुबन: राजकीय डिग्री महाविद्यालय, मधुबन में प्राचार्य प्रो. (डॉ.) ब्रह्मचारी व्यास नन्दन शास्त्री की अध्यक्षता में "संस्कृत साहित्य में योग का वैश्विक वैशिष्ट्य" विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि आचार्य डॉ. श्रवण कुमार एवं प्राचार्य के नेतृत्व में पौधरोपण से हुई। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्ज्वलित कर संगोष्ठी का शुभारंभ किया गया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य प्रो. (डॉ.) ब्रह्मचारी व्यास नन्दन शास्त्री ने कहा कि संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन एवं समृद्ध भाषा है। इसके साहित्य में वेद, उपनिषद, पुराण, दर्शन, व्याकरण, रामायण, महाभारत, श्रीमद्भगवद्गीता, महाकाव्य, नाटक एवं कथाओं सहित ज्ञान-विज्ञान के अनेक ग्रंथ समाहित हैं, जिनमें योग की वैश्विक महत्ता का विस्तृत वर्णन मिलता है। उन्होंने कहा कि योग जाति, पंथ, मत और संप्रदाय से ऊपर उठकर संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग है, जिससे विश्वभर में स्वास्थ्य, सद्विचार, शांति और सद्भाव का संदेश प्रसारित हो रहा है। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता आचार्य डॉ. श्रवण कुमार, प्रांत संगठन मंत्री, संस्कृत भारती बिहार प्रांत न्यास ने अपने संबोधन में कहा कि संस्कृत साहित्य में योग की वैश्विक उपयोगिता और विशिष्टता का व्यापक वर्णन मिलता है। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता, महाभारत और पुराणों के उदाहरणों के माध्यम से योग के महत्व को रेखांकित किया। साथ ही कुआं, तालाब, नदी और वृक्षों के मानव जीवन पर होने वाले उपकारों को योग की भावना से जोड़ते हुए सभी लोगों को नियमित योग अपनाने की प्रेरणा दी।

उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए युवाओं से योग, ध्यान और साधना को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि योग व्यक्ति को समत्व भाव के साथ कुशलतापूर्वक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम में डॉ. संतोष कुमार साह, डॉ. रवि भारती, डॉ. राकेश कुमार राम, डॉ. उमेश मल्लिक सहित महाविद्यालय के शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। संगोष्ठी के दौरान योग के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं वैश्विक महत्व पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।