सतीश आनंद की स्मृति में प्रेमचंद रंगशाला में श्रद्धांजलि सभा, रंगकर्मियों ने साझा कीं यादें

  • Post By Admin on Aug 31 2026
सतीश आनंद की स्मृति में प्रेमचंद रंगशाला में श्रद्धांजलि सभा, रंगकर्मियों ने साझा कीं यादें

पटना: बिहार एवं राष्ट्रीय रंगमंच के ख्यातिप्राप्त अभिनेता एवं निर्देशक सतीश आनंद की स्मृति में प्रेमचंद रंगशाला, पटना में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। बिहार के रंगकर्मियों की ओर से आयोजित शोक सभा में कलाकारों ने सतीश आनंद के निधन को रंगमंच जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया। वक्ताओं ने कहा कि उनकी कला साधना, विचार और मार्गदर्शन रंगकर्मियों के बीच हमेशा जीवित रहेंगे।

वरिष्ठ रंगकर्मी एन.एन. पाण्डेय ने सतीश आनंद से जुड़ी यादों को साझा करते हुए कहा कि पटना के दर्शकों में नाटक देखने की आदत विकसित करने में सतीश आनंद की महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रेमलता मिश्र ने उनके स्नेहिल व्यवहार को याद करते हुए कहा कि उनका अपनापन हमेशा स्मृतियों में बना रहेगा। फिल्म निर्देशक किरणकान्त वर्मा ने कहा कि क्रिकेट के प्रति गहरी रुचि रखने वाले सतीश आनंद ने उन्हें रंगमंच से जोड़ा। उन्होंने कहा कि सतीश आनंद की कल्पनाशीलता उनके निर्देशित नाटकों में स्पष्ट दिखाई देती थी। कला संगम में उनके साथ पार्श्व सहयोगी रहे कमल किशोर ने उनकी लगनशीलता को याद किया। उन्होंने कहा कि सतीश आनंद का समर्पित कार्यशैली का प्रभाव उनके साथ काम करने वाले लोगों को भी पूरी निष्ठा के साथ रंगकर्म करने के लिए प्रेरित करता था। अभिनेता विनीत झा ने कहा कि रंगमंच के मर्म और उसकी गंभीरता को सतीश आनंद की प्रशिक्षण शैली से समझा जा सकता है। वहीं सुषमा सिन्हा, पूनम ठाकुर एवं सोमा चक्रवर्ती ने कहा कि सतीश आनंद कलाकारों को अपने परिवार का हिस्सा मानते थे और सुख-दुःख में उनके साथ खड़े रहते थे।

शिवशंकर रत्नाकर ने कहा कि सतीश आनंद ने केवल रंगकर्म नहीं सिखाया, बल्कि रंगमंच के साथ जीवन जीने की कला भी सिखाई। मिथिलेश सिंह ने कहा कि बिहार रंगमंच को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में सतीश आनंद का योगदान अविस्मरणीय है। वरिष्ठ रंगकर्मी सुमन कुमार ने उनके साथ बिताए दौर की यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उस समय रंगकर्म को लगातार जारी रखने के लिए कलाकारों ने किस तरह संघर्ष किया और सतीश आनंद ने रंगमंच के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी।श्रद्धांजलि सभा का संयोजन अभय सिन्हा ने किया। उन्होंने युवाओं से रंगमंच से जुड़ने और इस कला परंपरा को आगे बढ़ाने की अपील की। कार्यक्रम में मनीष महिवाल, आदिल राशिद, विजेंद्र टांक, रविकांत, धीरज कुमार, प्रकाश भारती सहित बड़ी संख्या में रंगकर्मी और कलाकार मौजूद रहे। सभी ने सतीश आनंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी स्मृतियों और रंगमंच के प्रति योगदान को याद किया।