पटना में मुख्य पार्षद महासंघ की राज्यस्तरीय संगोष्ठी, अधिकारों को लेकर एकजुट हुए जनप्रतिनिधि
- Post By Admin on Aug 31 2026
पटना: बिहार के नगर निकायों के निर्वाचित मुख्य पार्षदों के अधिकार, वित्तीय शक्तियां, सुरक्षा और नगर निकायों की स्वायत्तता को लेकर सोमवार को पटना के विद्यापति भवन में मुख्य पार्षद महासंघ की राज्यस्तरीय संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें विभिन्न नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों से बड़ी संख्या में मुख्य पार्षद, उनके प्रतिनिधि एवं अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हुए। संगोष्ठी की अध्यक्षता महासंघ के अध्यक्ष कुमार राघवेंद्र राघव ने की। उपाध्यक्ष निलेश कुमार, महासचिव किरण उपाध्याय, सचिव-सह-मीडिया प्रभारी सचिन गुप्ता, संयुक्त सचिव अमित कुमार, सचिव डेजी कुमारी एवं कोषाध्यक्ष अर्चना कुमारी ने भी कार्यक्रम के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में विभिन्न नगर निकायों से पहुंचे जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में काम करने के दौरान सामने आने वाली समस्याओं को रखा। उनका कहना था कि शहरों के विकास और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निर्वाचित मुख्य पार्षदों को उनके वैधानिक अधिकार प्रभावी रूप से मिलना जरूरी है। महासंघ के अध्यक्ष कुमार राघवेंद्र राघव के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों ने कहा कि जिम्मेदारियों के साथ मुख्य पार्षदों के अधिकार भी स्पष्ट होने चाहिए। महासचिव किरण उपाध्याय ने सशक्त स्थायी समिति के अधिकार, मुख्य पार्षद की भूमिका और प्रशासनिक व्यवस्था में निर्वाचित प्रतिनिधियों की भागीदारी से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि नगर निकायों में जनप्रतिनिधियों की भूमिका मजबूत किए बिना शहरी विकास को अपेक्षित गति देना मुश्किल है। सचिव डेजी कुमारी और सचिव-सह-मीडिया प्रभारी सचिन गुप्ता ने भी संगठन से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपनी बात रखी। खगड़िया नगर परिषद की सभापति एवं महासंघ की कोषाध्यक्ष अर्चना कुमारी ने नगर निकायों के संचालन में आने वाली व्यवहारिक समस्याओं और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों पर चर्चा की। खगड़िया से नगर सभापति प्रतिनिधि ज्योतिष मिश्रा भी मौजूद रहे।
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधि सीधे जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं। ऐसे में उनके अधिकारों के साथ सुरक्षा को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था जरूरी है। कार्यक्रम में पटना मेयर प्रतिनिधि शिशिर कुमार, मनोज उपाध्याय सहित विभिन्न नगर निकायों के प्रतिनिधि शामिल हुए।संगोष्ठी में महासंघ की ओर से सरकार के समक्ष सात प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें सशक्त स्थायी समिति के अधिकारों को प्रभावी एवं स्पष्ट करने और मुख्य पार्षद को नगर निकाय के चेक पर संयुक्त हस्ताक्षर का अधिकार देने की मांग प्रमुख रही। इसके साथ भुगतान प्रक्रिया में आवश्यक वित्तीय अधिकार और डोंगल सुविधा उपलब्ध कराने तथा मुख्यमंत्री समग्र शहरी विकास योजना की समितियों में मुख्य पार्षदों की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई।
महासंघ ने नगर पंचायतों के मुख्य पार्षदों को नगर निगम एवं नगर परिषद की तर्ज पर सरकारी वाहन उपलब्ध कराने की भी मांग की। इसके अलावा मुख्य पार्षदों की सुरक्षा मजबूत करने, आवश्यकता के अनुसार अंगरक्षक उपलब्ध कराने तथा पात्रता एवं आवश्यकता के आधार पर शस्त्र अनुज्ञप्ति की प्रक्रिया में प्राथमिकता देने की मांग भी सरकार के सामने रखी गई। महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि नगर निकाय लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। शहरी विकास को गति देने के लिए निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच अधिकार एवं जिम्मेदारी की स्पष्ट व्यवस्था आवश्यक है। संगोष्ठी के माध्यम से सरकार से मुख्य पार्षदों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक नीतिगत एवं विभागीय निर्णय लेने का आग्रह किया गया। विद्यापति भवन में आयोजित यह कार्यक्रम नगर निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों की एकजुटता और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने का मंच बना।