माँ स्कंदमाता पूजन व डॉ. कलाम की जयंती पर पर्यावरण भारती ने लगाए देव व फलदार वृक्ष

  • Post By Admin on Oct 15 2026
माँ स्कंदमाता पूजन व डॉ. कलाम की जयंती पर पर्यावरण भारती ने लगाए देव व फलदार वृक्ष

लखीसराय : जिले के चानन प्रखंड अंतर्गत बिछवे में नवरात्रि के पंचम स्वरूप माँ स्कंदमाता पूजन, विश्व छात्र दिवस तथा पूर्व राष्ट्रपति ‘मिसाइल मैन’ डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती के उपलक्ष्य में पर्यावरण भारती द्वारा पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान जय प्रकाश शर्मा के नेतृत्व में देव वृक्ष बरगद, तुलसी और आम के पौधे रोपे गए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पर्यावरण भारती के संस्थापक, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के प्रांत संयोजक व अखिल भारतीय पेड़ उपक्रम टोली सदस्य राम बिलास शाण्डिल्य ने कहा कि वर्ष 2008 से पर्यावरण भारती निरंतर वृक्षारोपण अभियान चलाकर धरती को हरा-भरा रखने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में बिहार भर में 3,123 समर्पित सामाजिक कार्यकर्ताओं को पर्यावरण प्रहरी के रूप में तैयार कर इस अभियान से जोड़ा गया है। संगठन के सभी कार्यकर्ता निस्वार्थ और अवैतनिक रूप से कार्यरत हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य ग्लोबल वार्मिंग से निपटना और प्रकृति से भरपूर ऑक्सीजन प्राप्त करना है।

दुर्गा पूजा के ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि नवरात्रि नौ दिनों की पावन साधना का पर्व है। उन्होंने उल्लेख किया कि बंगाल के दुर्गापुर में वर्ष 1,500 ई. में संत मेधा मुनि के मार्गदर्शन में राजा सुरथ द्वारा तथा बाद में 1,610 ई. में कोलकाता के साबरना राय चौधरी परिवार द्वारा इस पूजन की परंपरा को आगे बढ़ाया गया था। नवरात्रि के पांचवें दिन ममतामयी माँ स्कंदमाता का पूजन होता है, जो भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं। माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों का आह्वान दैत्यों के संहार व धर्म की रक्षा हेतु हुआ था। साथ ही, दुर्गा पूजन में आम के पत्तों की अनिवार्यता को देखते हुए फलदार वृक्ष आम का रोपण धार्मिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

वहीं, पर्यावरणविद राम चरित्र शर्मा ने विश्व छात्र दिवस के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में जन्मे भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का पूरा जीवन छात्रों और राष्ट्र निर्माण को समर्पित रहा। कलाम साहब का मानना था कि “सपने वो नहीं होते जो आप सोने के बाद देखते हैं, सपने वो होते हैं जो आपको सोने नहीं देते।” विद्यार्थियों के प्रति उनके अगाध प्रेम और शिक्षा के क्षेत्र में अप्रतिम योगदान के कारण ही उनकी जयंती को विश्व छात्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस पौधारोपण अभियान में जय प्रकाश शर्मा, सागर महतो, बादल महतो, राम चरित्र शर्मा, राम बिलास शाण्डिल्य, पीयूष कुमार, आशीष कुमार, मनीष कुमार, आयुष कुमार, राजेन्द्र, छोटू, शिवम, सुधांशु, दीपक सहित कई ग्रामीण एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।