बिहार में स्कूल खोलना अब आसान नहीं, सरकार ने लागू किए कड़े नियम

  • Post By Admin on Jun 20 2026
बिहार में स्कूल खोलना अब आसान नहीं, सरकार ने लागू किए कड़े नियम

पटना : बिहार सरकार ने निजी एवं गैर-सरकारी विद्यालयों की मान्यता संबंधी नियमों को और सख्त कर दिया है। राज्य सरकार और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने तथा छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘बिहार विद्यालय परीक्षा समिति संबद्धता (संशोधन) नियमावली, 2026’ लागू कर दी है। इसकी अधिसूचना 16 जून 2026 को बिहार गजट में प्रकाशित की गई है।

नई नियमावली के तहत अब माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के निजी विद्यालयों को मान्यता प्राप्त करने के लिए खेल मैदान, पर्याप्त भूमि, भवन, प्रयोगशाला, पुस्तकालय और सुरक्षा संबंधी निर्धारित मानकों को पूरा करना अनिवार्य होगा। सरकार के इस फैसले का सबसे अधिक प्रभाव उन स्कूलों पर पड़ने की संभावना है, जो अब तक बुनियादी सुविधाओं के अभाव में संचालित हो रहे हैं। नियमों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च माध्यमिक विद्यालय के लिए न्यूनतम 6000 वर्ग मीटर भूमि होना आवश्यक होगा, जिसमें कम से कम 2000 वर्ग मीटर क्षेत्र खेल मैदान के लिए आरक्षित रहेगा। साथ ही विद्यालय परिसर की चहारदीवारी भी अनिवार्य होगी। पटना नगर क्षेत्र में विद्यालयों के लिए न्यूनतम 3200 वर्ग मीटर तथा अन्य शहरी क्षेत्रों में 4000 वर्ग मीटर भूमि निर्धारित की गई है। यदि किसी शहरी क्षेत्र में खेल मैदान विद्यालय परिसर से अलग स्थित है, तो उसकी दूरी 200 मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही छात्रों को मैदान तक पहुंचने के लिए किसी व्यस्त सड़क या राष्ट्रीय राजमार्ग को पार नहीं करना होगा। विद्यालय की भूमि स्वामित्व वाली अथवा कम से कम 30 वर्षों की वैध लीज पर होना भी जरूरी किया गया है।

नई नियमावली में विद्यालय भवन की संरचना और सुविधाओं के लिए भी स्पष्ट मानक निर्धारित किए गए हैं। माध्यमिक विद्यालय के लिए न्यूनतम 870 वर्ग मीटर क्षेत्रफल आवश्यक होगा। इसके अंतर्गत 35-35 वर्ग मीटर के छह कक्ष, भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान की अलग-अलग प्रयोगशालाएं, 50 वर्ग मीटर का कंप्यूटर कक्ष तथा 50 वर्ग मीटर की लाइब्रेरी अनिवार्य होगी। उच्च माध्यमिक विद्यालय के लिए न्यूनतम 880 वर्ग मीटर और संयुक्त विद्यालयों के लिए 1110 वर्ग मीटर क्षेत्र निर्धारित किया गया है।संबद्धता के लिए आवेदन करने वाले विद्यालयों को 15 हजार रुपए का निरीक्षण शुल्क ऑनलाइन जमा करना होगा, जो किसी भी स्थिति में वापस नहीं किया जाएगा। सभी निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले विद्यालयों को प्रारंभिक रूप से पांच वर्षों के लिए अस्थायी संबद्धता प्रदान की जाएगी। इसके बाद विभागीय समीक्षा के आधार पर नवीनीकरण किया जाएगा।

नियमावली में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि कोई विद्यालय वित्तीय अनियमितता, फर्जी नामांकन, सामाजिक वैमनस्य फैलाने या अन्य नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया जाता है, तो बिहार विद्यालय परीक्षा समिति उसे कारण बताओ नोटिस जारी करेगी। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विद्यालय की मान्यता निलंबित या रद्द की जा सकती है। शिक्षाविदों की मानें तो इन नए नियमों से बिना बुनियादी सुविधाओं वाले विद्यालयों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा और विद्यार्थियों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण तथा बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध हो सकेगा।