विश्व रंगमंच दिवस पर तुम कब जाओगे का मंचन, व्यंग्य से गूंजा रंगवेदिका सभागार
- Post By Admin on Mar 27 2026
पटना : विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर द्वारिका नगर रोड संख्या–2, खेमनीचक स्थित ‘रंगवेदिका’ सभागार में नाट्य संस्था लोक पंच द्वारा नवीनतम प्रस्तुति “तुम कब जाओगे” का मंचन किया गया। व्यंग्य और हास्य से भरपूर इस नाटक को दर्शकों ने खूब सराहा और प्रस्तुति का भरपूर आनंद लिया।
यह नाटक प्रसिद्ध व्यंग्यकार शरद जोशी की चर्चित रचना से प्रेरित है। इसकी कहानी एक ऐसे अनचाहे मेहमान के इर्द-गिर्द घूमती है, जो बिना सूचना के एक साधारण मध्यवर्गीय परिवार के घर पहुंचता है और फिर जाने का नाम ही नहीं लेता। शुरुआत में घर के लोग भारतीय परंपरा के अनुसार पूरे मन से उसका स्वागत करते हैं, लेकिन समय बीतने के साथ वही मेहमान घर की दिनचर्या और संतुलन को प्रभावित करने लगता है।
नाटक में दिखाया गया है कि बढ़ते खर्च, कम होती निजी जगह और बदलती परिस्थितियों के बीच भी मेजबान खुलकर कुछ कह नहीं पाता, क्योंकि संस्कार और शिष्टाचार उसे रोकते हैं। बाहर से मुस्कान बनी रहती है, लेकिन भीतर एक ही सवाल गूंजता है—“आखिर ये जाएंगे कब?” इसी आंतरिक द्वंद्व को हास्य, व्यंग्य और चुटीले संवादों के माध्यम से मंच पर बेहद रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया।
प्रस्तुति के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा महत्वपूर्ण है, लेकिन अपनी सीमाओं और निजी जीवन का सम्मान करना भी उतना ही जरूरी है। साधारण घरेलू परिस्थितियों के जरिए नाटक सामाजिक औपचारिकताओं, रिश्तों की जटिलताओं और मानवीय मनोभावों को प्रभावशाली तरीके से सामने लाता है।
मंच पर कलाकारों में सोनू कुमार, सिमरन कुमारी, हिमांशु कुमार, अरबिंद, शिवम और अभिषेक ने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीता।
मंच के पीछे संगीत संचालन अजीत कुमार, प्रकाश व्यवस्था राम प्रवेश, रूप सज्जा रोज सिंह, वस्त्र विन्यास रितिका, फोल्डर जफर आलम और मंच व्यवस्था देवयांक ने संभाली।
नाटक की मूल कहानी शरद जोशी की है, जबकि इसका निर्देशन जहाँगीर ने किया। प्रस्तुति नियंत्रक की भूमिका मनीष महिवाल ने निभाई। कार्यक्रम का आयोजन नाट्य संस्था लोक पंच, पटना द्वारा किया गया।