संत रविदास जयंती पर पर्यावरण भारती ने दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश
- Post By Admin on Feb 01 2026
लखीसराय : संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती के अवसर पर पर्यावरण भारती द्वारा के.आर.के. मैदान परिसर, नया बाजार में फलदार वृक्ष आम का पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम का नेतृत्व पर्यावरण प्रहरी अक्षत राज ने किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पर्यावरण भारती के संस्थापक राम बिलास शांडिल्य ने कहा कि भारतीय संतों ने भक्ति आंदोलन के माध्यम से समाज सुधार का ऐतिहासिक कार्य किया है। संत रविदास जी ने समाज में व्याप्त भेदभाव को मिटाने के लिए जीवनभर संघर्ष किया और मानवता को प्रेम, समानता और भाईचारे का मार्ग दिखाया। उन्होंने बताया कि संत रविदास जी का जन्म माघ माह की पूर्णिमा को वाराणसी के सीरगोवर्धन में हुआ था और उन्हें संत रैदास के नाम से भी जाना जाता है। उनकी प्रमुख शिष्या साध्वी मीरा बाई थीं, जिनका प्रसिद्ध भजन “मेरे तो गिरिधर गोपाल” आज भी भक्तों को प्रेरणा देता है।
राम बिलास शांडिल्य ने संत रविदास जी के प्रसिद्ध कथन “मन चंगा तो कठौती में गंगा” का उल्लेख करते हुए कहा कि संत रविदास ने मानव को अपने मन को शुद्ध और पवित्र बनाने का संदेश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि सनातन परंपरा में माघ पूर्णिमा पर गंगा स्नान को पुण्य माना गया है, लेकिन जरूरतमंदों की सेवा और दान उससे भी बड़ा पुण्य है।
उन्होंने संत रविदास जी की वाणी “ऐसी वाणी बोलिये, मन का आपा खोय, औरन को शीतल करे, आपहु शीतल होय” को उद्धृत करते हुए कहा कि संत का संदेश था कि मानव अपने व्यवहार और वाणी से पूरे संसार को जीत सकता है।
इस अवसर पर पौधारोपण को संत रविदास जयंती पर एक स्मरणीय और प्रेरणादायक कार्य बताते हुए समाज को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में अक्षत राज, रियांश कुमार, नीतिश कुमार, सन्नी कुमार, गोपाल कुमार, संजय कुमार रविदास, हरिनंदन पासवान, दिनेश मल्लिक सहित कई लोग मौजूद रहे।