बज्जिका भाषा और साहित्य के संरक्षण में योगदान देने वाली विभूतियों का सम्मान

  • Post By Admin on Oct 16 2026
बज्जिका भाषा और साहित्य के संरक्षण में योगदान देने वाली विभूतियों का सम्मान

मुजफ्फरपुर: बज्जिका भाषा, साहित्य और लोकसंस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान के लिए कठपुतली कलाकार सुनील कुमार को ‘महाकवि अवधेश्वर अरुण बज्जिका सेवी सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया। अरुणादित्य ट्रस्ट एवं तथागत सांस्कृतिक फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में शहीद प्रमोद बी.एड. कॉलेज, माधोपुर सुस्ता, मुजफ्फरपुर के प्रांगण में बज्जिका दिवस सह 26वें महाकवि अवधेश्वर अरुण बज्जिका सेवी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर साहित्यकारों, कलाकारों और संस्कृति से जुड़े लोगों ने बज्जिका भाषा की समृद्ध परंपरा पर अपने विचार रखे।

सरला श्रीवास सोशल कल्चरल रिसर्च फाउंडेशन की मालीघाट, मुजफ्फरपुर स्थित बैठक में संस्थान की संरक्षक एवं वरिष्ठ कठपुतली कलाकार कांता देवी ने कार्यक्रम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समारोह में बज्जिका भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को अंगवस्त्र, प्रतीक चिह्न और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत कुमार आदित्य के मंगलाचरण से हुई। उन्होंने ट्रस्ट के अभियान के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. यशवंत कुमार ने विषय प्रवेश कराया। प्रथम सत्र का संचालन डॉ. रणवीर कु. राजन तथा दूसरे सत्र यानी कवि सम्मेलन का संचालन सविता राज ने किया बज्जिकांचल विकास पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेन्द्र राकेश ने उद्घाटन वक्तव्य में बज्जिका भाषा के महत्व को रेखांकित किया। मुख्य वक्ता प्रसिद्ध आलोचक डॉ. रामप्रवेश सिंह ने कहा कि साहित्य के आगे लोक चलता है और उसके पीछे शास्त्र चलता है। महाकवि अवधेश्वर अरुण लोकजीवन के चितेरे और सर्जक थे। उन्होंने बज्जिका रामायण में वर्णित राम के लोकजीवन से गहरे जुड़ाव का भी उल्लेख किया।

विशिष्ट अतिथि डॉ. संजय पंकज ने महाकवि अरुण को अपना मानस पिता बताते हुए कहा कि वे सांस्कृतिक भावधारा और आध्यात्मिक चेतना के सामाजिक रचनाकार थे। वहीं, ज्वाला सांध्यपुष्प ने उन्हें युगांतकारी कवि बताया। मुख्य अतिथि शहीद प्रमोद डिग्री कॉलेज के प्राचार्य श्याम नंदन कुमार यादव तथा अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ. शारदा चरण ने भी बज्जिका भाषा और साहित्य की प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे। समारोह में बज्जिका भाषा एवं साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रो. दिनेश कुमार सिंह, डॉ. उषा किरण, हंसलाल साह, कठपुतली कलाकार सुनील कुमार और प्रो. अमिताभ कुमार सिन्हा को सम्मानित किया गया।

लोकगीतों के माध्यम से बज्जिका संस्कृति को किया प्रस्तुत

सम्मान समारोह के दौरान कठपुतली कलाकार सुनील कुमार ने अपने बज्जिका गीतों की प्रस्तुति से लोकसंस्कृति की छटा बिखेरी। उन्होंने ‘ईहे लीचिया खईले महाकवि अवधेश्वर अरुण हो गेलथिन लाले लाल हो’, ‘मुजफ्फरपुर चलु हे सखी’ और ‘आव आव तितली रानी हम्मर बगिया में’ जैसे गीत प्रस्तुत किए। उनकी प्रस्तुतियों के माध्यम से बज्जिका भाषा की मिठास और क्षेत्रीय लोकजीवन की झलक देखने को मिली।

इस अवसर पर सुनील कुमार ने बज्जिकांचल विकास पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेन्द्र राकेश को अपना लीची गीत संग्रह ‘लीचिया लाले’ भेंट किया और उन्हें बज्जिका दिवस की बधाई दी। समारोह के अंतिम सत्र में उदय नारायण सिंह की अध्यक्षता में कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। इसमें रविकिशोर चंचल, मनिभूषण अकेला, अवधेश तृषित, पुष्पा गुप्ता, सविता राज सहित कई कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। सम्मान मिलने पर सुनील कुमार को मुजफ्फरपुर शांति सेना के संयोजक सोनू सरकार, शम्भू मोहन प्रसाद, अनिल कुमार ठाकुर, लोक गायिका अनिता कुमारी, बबिता ठाकुर और सुमन कुमारी सहित अनेक लोगों ने बधाई दी।