मुजफ्फरपुर में याद किए गए गांधीवादी विचारक एस.एन. सुब्बाराव, शांति और सद्भाव का संदेश
- Post By Admin on Oct 27 2026
मुजफ्फरपुर : प्रख्यात गांधीवादी विचारक एवं समाजसेवी पद्मश्री डॉ. एस.एन. सुब्बाराव की पुण्यतिथि पर मंगलवार को मुजफ्फरपुर के मालीघाट में श्रद्धांजलि, संवाद और विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। शांति सेना की ओर से आयोजित कार्यक्रम में भाईजी के गांधीवादी विचारों, सामाजिक सद्भाव, राष्ट्रीय एकता और युवा चेतना के लिए किए गए कार्यों को याद किया गया। इस अवसर पर सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्र में योगदान के लिए माधुरी यादव और प्रसिद्ध कठपुतली कलाकार सुनील कुमार को अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न और मधुबनी पेंटिंग भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संवाद संस्थान के संयोजक प्रोफेसर सोनू सरकार ने की। उन्होंने कहा कि भाईजी डॉ. एस.एन. सुब्बाराव का पूरा जीवन अहिंसा, प्रेम, भाईचारे और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने के लिए समर्पित रहा। उन्होंने समाज में स्थायी बदलाव लाने के लिए संवाद, विश्वास और संवेदनशीलता को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, भाईजी ने गांधीवादी विचारों को केवल अपने भाषणों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें सामाजिक जीवन में उतारने का प्रयास किया।
प्रोफेसर सोनू सरकार ने कहा कि भाईजी ने युवाओं को रचनात्मक सामाजिक कार्यों से जोड़ने और उनमें राष्ट्रप्रेम तथा सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए निरंतर काम किया। उनके युवा शिविरों में अलग-अलग क्षेत्रों और पृष्ठभूमि के युवाओं को एक साथ आने का अवसर मिलता था। इन प्रयासों से राष्ट्रीय एकता, आपसी सहयोग और सद्भाव का संदेश मजबूत हुआ।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भाईजी के विचारों की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। समाज में मतभेद और वैचारिक दूरियों को कम करने के लिए संवाद तथा अहिंसक प्रयासों को बढ़ावा देना जरूरी है। भाईजी का जीवन बताता है कि समाज और देश के प्रति समर्पण केवल विचारों से नहीं, बल्कि सेवा, त्याग और व्यवहार से प्रकट होता है।
स्वतंत्रता आंदोलन से समाजसेवा तक का सफर
वर्ष 1929 में बेंगलुरु में जन्मे डॉ. एस.एन. सुब्बाराव किशोरावस्था में ही स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए थे। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मात्र 13 वर्ष की आयु में उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया। स्वतंत्रता के बाद भी उन्होंने समाज निर्माण, युवाओं के विकास और गांधीवादी विचारों के प्रचार-प्रसार को अपने जीवन का उद्देश्य बनाए रखा।
चंबल घाटी में बागियों और डकैतों को हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित करना उनके सामाजिक कार्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। उन्होंने विश्वास, करुणा और मानवीय संवेदना के माध्यम से लोगों को जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया। उनका मानना था कि किसी व्यक्ति को केवल उसके अतीत से नहीं, बल्कि उसके बेहतर भविष्य की संभावनाओं से भी देखा जाना चाहिए। भाईजी ने युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने के लिए नेशनल यूथ प्रोजेक्ट की स्थापना की और राष्ट्रीय सेवा योजना के शुरुआती दौर में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से युवाओं में श्रमदान, सामाजिक सेवा, राष्ट्रीय एकता और सद्भावना के प्रति जागरूकता बढ़ाने का काम हुआ।
कला और संस्कृति से सामाजिक बदलाव का संदेश
कार्यक्रम में सरला श्रीवास सोशल कल्चरल रिसर्च फाउंडेशन के सचिव एवं कठपुतली कलाकार सुनील कुमार ने भाईजी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे प्रेम, करुणा, भाईचारे और इंसानियत के प्रतीक थे। उन्होंने अपना जीवन देश, समाज और युवाओं को समर्पित किया। युवा शिविरों के माध्यम से नई पीढ़ी को जोड़ना और उनमें राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित करना उनके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल था।
सुनील कुमार ने कहा कि कला, संस्कृति और लोकपरंपराएं सामाजिक जागरूकता फैलाने के प्रभावी माध्यम हैं। कठपुतली कला के जरिए भी आम लोगों तक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश पहुंचाए जा सकते हैं। कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भाईजी के विचारों से प्रेरणा लेकर समाज में शांति, प्रेम और सद्भाव का संदेश पहुंचाते रहना चाहिए।
इस अवसर पर माधुरी यादव ने कहा कि चंबल घाटी के बागियों को हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित करना भाईजी के विश्वास, धैर्य और मानवीय संवेदना का उल्लेखनीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि प्रेम और इंसानियत के माध्यम से लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। समाजसेवा का वास्तविक उद्देश्य लोगों को सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराना भी है।
माधुरी यादव और सुनील कुमार को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान माधुरी यादव और कठपुतली कलाकार सुनील कुमार को अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न तथा मधुबनी पेंटिंग भेंट कर सम्मानित किया गया। आयोजकों ने उनके सामाजिक-सांस्कृतिक योगदान और कला के माध्यम से समाज के प्रति समर्पण की सराहना की। उपस्थित लोगों ने कहा कि सामाजिक कार्यों और लोककलाओं से जुड़े लोगों का सम्मान नई पीढ़ी को सकारात्मक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करता है।
कार्यक्रम में वरिष्ठ कठपुतली कलाकार कांता देवी, आदित्य राज ठाकुर, गायत्री देवी और शिवम कुमार सहित अन्य लोग मौजूद रहे। सभी ने भाईजी के विचारों को याद करते हुए समाज में प्रेम, भाईचारा और सद्भाव बढ़ाने तथा गांधीवादी मूल्यों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।कार्यक्रम का समापन सामाजिक सद्भाव, अहिंसा और राष्ट्रीय एकता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के आह्वान के साथ हुआ। धन्यवाद ज्ञापन सरला श्रीवास युवा मंडल की अध्यक्ष सुमन कुमारी ने किया।