अब छात्रों के खाते में नहीं आएंगे पोशाक के पैसे, बिहार सरकार ने बदल दी पूरी व्यवस्था
- Post By Admin on Jun 20 2026
पटना : बिहार सरकार ने सरकारी विद्यालयों में संचालित पोशाक योजना में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से छात्र-छात्राओं को यूनिफॉर्म खरीदने के लिए खाते में नकद राशि भेजने की व्यवस्था समाप्त कर दी जाएगी। इसके स्थान पर जीविका के माध्यम से तैयार कराई गई दो सेट सिले-सिलाए यूनिफॉर्म सीधे विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जाएगी।
शिक्षा विभाग ने इस नई व्यवस्था को लागू करने की दिशा में पहल शुरू कर दी है। प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर ने बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) की मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी को पत्र भेजकर इस प्रस्ताव पर विभागीय सहमति देने का अनुरोध किया है। बताया जा रहा है कि शिक्षा विभाग के सचिव स्तर से भी इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है।
पहली से 12वीं तक के लाखों विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
नई व्यवस्था के तहत मुख्यमंत्री बालक पोशाक योजना, मुख्यमंत्री बालिका पोशाक योजना और बिहार शताब्दी मुख्यमंत्री बालिका पोशाक योजना के लाभार्थियों को दो-दो सेट यूनिफॉर्म उपलब्ध कराई जाएगी। कक्षा एक से आठवीं तक के छात्र-छात्राओं और नौवीं से 12वीं तक की छात्राओं को इसका लाभ मिलेगा। वर्तमान में इन योजनाओं के तहत 75 प्रतिशत से अधिक उपस्थिति वाले विद्यार्थियों को डीबीटी के माध्यम से पोशाक मद की राशि दी जाती है।
नकद के बजाय सीधे यूनिफॉर्म देने की तैयारी
शिक्षा विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था से सभी विद्यार्थियों को एक समान और निर्धारित गुणवत्ता की यूनिफॉर्म मिल सकेगी। विभाग को लंबे समय से ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कई मामलों में पोशाक के लिए दी गई राशि अन्य जरूरतों में खर्च हो जाती है या फिर उससे मानक के अनुरूप यूनिफॉर्म नहीं खरीदी जाती। ऐसे में तैयार पोशाक उपलब्ध कराने से इन समस्याओं का समाधान होगा।
जीविका समूहों को मिलेगा बड़ा काम
इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ना भी है। यूनिफॉर्म की सिलाई और आपूर्ति का कार्य जीविका से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों को सौंपा जाएगा। इससे हजारों जीविका दीदियों को आय का नया स्रोत मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
शिक्षा और स्वरोजगार को मिलेगा साथ-साथ बढ़ावा
सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से एक तरफ विद्यार्थियों को समय पर बेहतर गुणवत्ता की यूनिफॉर्म मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ महिला स्वयं सहायता समूहों को बड़े स्तर पर रोजगार उपलब्ध होगा। इस तरह यह पहल शिक्षा और महिला सशक्तिकरण, दोनों लक्ष्यों को एक साथ आगे बढ़ाने में सहायक साबित हो सकती है।