बिहार की सिनेयात्रा कार्यक्रम के समापन पर मैथिली सिनेमा की विरासत को मिला सम्मान
- Post By Admin on Feb 23 2026
लखीसराय : जिले में कला, संस्कृति और सिनेमा को समर्पित संस्था सिनेयात्रा द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय कार्यक्रम “बिहार की सिनेयात्रा : रजतपट की विरासत” का तीसरा और अंतिम दिन मैथिली सिनेमा को समर्पित रहा। कार्यक्रम में मिथिला की सांस्कृतिक विरासत और प्रारंभिक फिल्मों की ऐतिहासिक भूमिका पर विशेष चर्चा हुई।
इस अवसर पर पहली मैथिली फिल्म की आधारशिला मानी जाने वाली “ममता गाबय गीत” के गीत-संगीत की विशेष प्रस्तुति कला संस्कृति पदाधिकारी सह गायक कलाकार मृणाल रंजन ने दी। उनकी मधुर स्वर प्रस्तुति ने सभागार को भाव-विभोर कर दिया और मिथिला की लोकधुनों की मिठास वातावरण में घुल गई।
कार्यक्रम के दौरान पहली रिलीज़ मैथिली फिल्म “कन्यादान” का प्रदर्शन भी किया गया। सिनेयात्रा के सचिव एवं फिल्मकार रविराज पटेल ने बताया कि “ममता गाबय गीत” का निर्माण वर्ष 1962 में शुरू हुआ था, लेकिन विभिन्न कारणों से इसे प्रदर्शित होने में लगभग 20 वर्ष लगे और अंततः 1982 में रिलीज़ हो सकी। वहीं “कन्यादान” वर्ष 1971 में बनकर दर्शकों के समक्ष आ गई। इस प्रकार मैथिली सिनेमा के इतिहास में दोनों फिल्मों को अलग-अलग दृष्टिकोण से ‘प्रथम’ माना जाता है—एक निर्माण के आधार पर और दूसरी रिलीज़ के आधार पर।
“ममता गाबय गीत” ग्रामीण मिथिला परिवार की भावनात्मक कथा है, जिसमें माँ के त्याग, बेटी के संस्कार और सामाजिक मर्यादाओं को मार्मिक रूप से चित्रित किया गया है। फिल्म का निर्देशन सी परमानंद ने किया था। इसमें प्यारे मोहन सहाय और अजरा ने मुख्य भूमिकाएं निभाईं। गीतकार रवीन्द्रनाथ ठाकुर के लिखे गीतों को गीता दत्त, सुमन कल्याणपुर और महेंद्र कपूर ने स्वर दिया।
वहीं “कन्यादान” प्रसिद्ध साहित्यकार हरिमोहन झा की रचना पर आधारित और फणी मजूमदार द्वारा निर्देशित फिल्म है। इसमें दहेज प्रथा, सामाजिक रूढ़ियों और विवाह संस्कार जैसे विषयों को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया है। फिल्म ने मैथिली सिनेमा को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के समापन पर सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी मिथिलेश मिश्र तथा मृणाल रंजन को सिनेयात्रा की ओर से स्मृति-चिह्न एवं अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। समारोह में कई गणमान्य नागरिकों के साथ बालिका विद्यापीठ, वेद विद्यालय और बालिका फुटबॉल टीम की खिलाड़ी भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।
गरिमामय वातावरण में संपन्न इस आयोजन ने मैथिली सिनेमा की ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया।